जुहू बीच पर निर्माण साइट से कीचड़ भरा पानी बहने का आरोप, समुद्री जीवों को खतरा
जुहू तारा रोड की एक निर्माण साइट से कई दिनों से कीचड़ और गाद सीधे समुद्र तट और समुद्र में जाने का आरोप है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई के जुहू तारा रोड पर चल रही एक निर्माण साइट से कई दिनों से कीचड़ भरा पानी और गाद सीधे जुहू बीच और समुद्र में छोड़े जाने का आरोप है। इससे समुद्री प्रदूषण और तटीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ गई है।
यह मामला समुद्री पारिस्थितिकी विशेषज्ञ शौनक मोदी ने उठाया। वे कोस्टल कंजर्वेशन फाउंडेशन के डायरेक्टर और मरीन लाइफ ऑफ मुंबई के संस्थापक हैं। उन्होंने 24 अक्टूबर को X पर एक पोस्ट में चेतावनी दी कि इस तरह छोड़ा गया पानी समुद्री जीवों को नुकसान पहुंचा सकता है और तट के पूरे इकोसिस्टम को बिगाड़ सकता है।
आरोप के मुताबिक इस बहाव से बीच की एक फुट से ज्यादा रेत कट चुकी है और तट का एक बड़ा हिस्सा बारीक कीचड़ से ढक गया है। यह गाद समुद्र की तलहटी में रहने वाले जीवों के ऊपर जम सकती है और पानी की साफ़ दिखने की क्षमता भी घटा सकती है। निर्माण साइट पर पानी और गाद कैसे संभाली जा रही है, और जुहू के तटीय इलाके पर इसका क्या असर पड़ेगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
24 अक्टूबर को ही BMC के K-West वार्ड ऑफिस ने मोदी की पोस्ट का जवाब दिया। उसने कहा कि शिकायत महानगरपालिका के MARG पोर्टल पर दर्ज कर ली गई है। जवाब में लिखा था, "हमने आपकी शिकायत ब्रिहन्मुंबई महानगरपालिका के MARG पोर्टल पर दर्ज कर ली है। की जाने वाली कार्रवाई की ज्यादा जानकारी के लिए कृपया पोर्टल देखें।" शिकायत का रजिस्ट्रेशन नंबर KW_202600154276 बताया गया।
सोमवार को दोपहर बाद देर से मोदी जुहू बीच पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कथित तौर पर निर्माण साइट से आने वाला पानी अब भी बीच पर बह रहा था। यानी बहाव रुका नहीं था। सोमवार को ही BMC के जनसंपर्क अधिकारी से इस कथित बहाव और शिकायत के बाद की गई कार्रवाई पर जवाब मांगा गया था, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया था।
मोदी के मुताबिक डिस्चार्ज में गाद की मात्रा बहुत ज्यादा है, जो तलहटी पर या उसके पास रहने वाले जीवों को दबा सकती है। इससे पानी में गाद जमने और गंदलापन बढ़ने का खतरा भी है। उन्होंने कहा, "यह अपने आप में परेशान करने वाली बात है, लेकिन यह उस मौसम से भी मेल खाती है जब सेफालोपॉड (स्क्विड, ऑक्टोपस और कटलफिश) मुंबई के बीच को अपने अंडों की नर्सरी की तरह इस्तेमाल करते हैं। लगातार आता मीठा पानी उस नमक के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिस पर इंटरटाइडल प्रजातियां जिंदा रहने के लिए निर्भर हैं।"
मोदी ने यह भी कहा कि रेतीले किनारों पर पाए जाने वाले केकड़े, गैस्ट्रोपॉड और सी एनिमोन जैसे जीव भी इस असर में आ सकते हैं, क्योंकि उनके रहने की जगह में बड़ी मात्रा में मीठा पानी घुस रहा है। कीचड़ बहने से किनारे की बनावट भी बदल सकती है, जिससे इंटरटाइडल जोन में रहने वाले जीवों पर खतरा बढ़ता है।
इस मौसम में मुंबई के बीच सेफालोपॉड के लिए नर्सरी का काम करते हैं। नमक के स्तर में बदलाव और गाद का ज्यादा जमना उन प्रजातियों पर असर डाल सकता है, जो जिंदा रहने और प्रजनन के लिए अपेक्षाकृत स्थिर तटीय हालात पर निर्भर हैं।
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