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टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग: हथियार पहुंचाने के चार आरोपी 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग: हथियार पहुंचाने के चार आरोपी 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में गुरुवार को मुंबई की एस्प्लेनेड मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चार आरोपियों को 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। इन चारों में दो महिलाएं भी हैं। पुलिस का आरोप है कि वारदात में जो हथियार इस्तेमाल हुआ, उसे पहुंचाने का काम इन्हीं लोगों ने किया था।

चारों को 20 अक्टूबर को पकड़ा गया था। सबसे पहले दिल्ली पुलिस की नॉर्दर्न रेंज की स्पेशल सेल ने इन्हें हिरासत में लिया, फिर इन्हें दिल्ली से मुंबई लाया गया। यहां महाराष्ट्र पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने इन्हें औपचारिक तौर पर गिरफ्तार किया। पकड़े गए लोगों में हरियाणा के सोनीपत जिले के रोहणा गांव का 21 साल का कुणाल सिंह है। सोनीपत के ही खरखौदा का 19 साल का सुमित है, जिसका नाम एक रिपोर्ट में सोरोलिया और दूसरी में सुरलिया लिखा गया है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर की 23 साल की राधा वर्मा और आजमगढ़ की 23 साल की बबीता राव भी इनमें हैं।

पुलिस की कहानी के मुताबिक कुणाल ने अनिल पंडित के कहने पर अमृतसर से एक पिस्तौल और 20 राउंड कारतूस उठाए। सुमित उसके साथ गया था। इसके बाद कुणाल ने राधा को मुंबई तक हथियार ले जाने के लिए मना लिया। 15 अक्टूबर को वह राधा और बबीता को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन ले गया, और आरोप है कि पिस्तौल राधा के बैग में छिपाकर रखी गई। पुलिस का दावा है कि दोनों महिलाएं ट्रेन से हथियार मुंबई लाईं और शूटरों के हवाले कर दिए।

पुलिस के अनुसार 18 अक्टूबर को फायरिंग हो जाने के बाद अनिल ने कुणाल से कहा कि शूटरों के निकलने का बंदोबस्त करो, क्योंकि वे उस वक्त मुंबई में फंसे हुए थे। फिर राधा और बबीता ट्रेन से मुंबई से दिल्ली लौट गईं। 20 अक्टूबर को दोनों नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर धर ली गईं, जबकि कुणाल और सुमित सोनीपत में पकड़े गए। पुलिस ने कोर्ट से कहा कि ये चारों पहले पकड़े गए लोगों के साथ साजिश में सक्रिय थे।

सरकारी पक्ष ने 31 अक्टूबर तक हिरासत मांगी थी। उसकी दलील थी कि वारदात में इस्तेमाल हथियार अभी बरामद नहीं हुआ है और हथियार व कारतूस पहुंचाने की जिम्मेदारी इन्हीं चारों की थी।

बचाव पक्ष के वकीलों ने रिमांड का जमकर विरोध किया। एक वकील ने गिरफ्तारी की बुनियाद पर ही सवाल उठाए और कहा कि पुलिस आरोपियों को हथियारों और कारतूस की कथित सप्लाई से जोड़ नहीं पाई है। उनके मुताबिक महिलाओं को सिर्फ शक के आधार पर फंसाया जा रहा है।

वकील सचिन पाटील ने कहा कि पुलिस अब तक पिस्तौल का मेक तक साबित नहीं कर पाई। गिरफ्तारी से पहले किसी सह-आरोपी का बयान भी दर्ज नहीं हुआ था, और पूछताछ के लिए पुलिस के पास काफी वक्त था। उन्होंने कहा कि केवल शक पर गिरफ्तारी हिरासत की जायज वजह नहीं होती। उनका सवाल था कि महिलाओं को इस केस से जोड़ने वाला सबूत क्या है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सबूत की जांच तो पुलिस हिरासत के बिना भी हो सकती है, इसलिए उन्होंने न्यायिक हिरासत की मांग की। पाटील ने यह भी याद दिलाया कि बुधवार को रिमांड पर गए तीन और आरोपियों की हिरासत अभी शुरू ही हुई है।

एडवोकेट अजिंक्य मिरगल ने अदालत में कहा कि दोनों महिलाएं फायरिंग की जगह पर थीं ही नहीं, इसलिए उनसे हिरासत में और पूछताछ की जरूरत नहीं है। उन्होंने उन्हें सीधे न्यायिक हिरासत में भेजने की गुजारिश की।

दोनों पक्षों को सुनकर मजिस्ट्रेट ने 26 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत मंजूर कर दी। आरोपियों ने पुलिस की बदसलूकी की कोई शिकायत नहीं की, हालांकि कुणाल सिंह के सिर पर पट्टी बंधी दिखी।

फायरिंग की घटना 18 अक्टूबर की शाम जुहू में हुई थी। कम से कम दो लोगों ने श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाईं और मोटरसाइकिल पर भाग गए। अभिनेता को ज्यादा चोट नहीं आई, पर उनका ड्राइवर और एक राहगीर घायल हो गए। इस मामले में अब तक दस लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। बुधवार को कोर्ट ने रेहान उर्फ सुक्का, रितिक कुर्मी उर्फ रोशन और फूल सिंह को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा था।

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