ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो सैंक्चुअरी के पास सड़क पर मरा मिला गोल्डन जैकाल
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
ऐरोली ब्रिज के पास मुलुंड-ऐरोली रोड पर वाहन की टक्कर से भारतीय गोल्डन जैकाल की मौत का शक है।
मुंबई की तरफ जाने वाली मुलुंड-ऐरोली रोड की लेन पर, ऐरोली ब्रिज के पास, एक भारतीय गोल्डन जैकाल मरा हुआ मिला। यह जगह ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो सैंक्चुअरी के नज़दीक है। शक है कि किसी वाहन की टक्कर लगने से उसकी मौत हुई। गोल्डन जैकाल वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट के तहत शेड्यूल I की प्रजाति है, यानी उसे कानून में सबसे ऊंचे दर्जे की सुरक्षा मिली हुई है।
शुरू में लोगों ने इसे आवारा कुत्ता समझ लिया था। नैचुरलिस्ट महेश यादव को उनके एक दोस्त ने फोन करके बताया कि ऐरोली ब्रिज के पास मुंबई की तरफ वाली लेन पर एक जैकाल पड़ा है। यादव ने दोस्त से फोटो भेजने को कहा और फोटो देखकर पक्का हुआ कि यह भारतीय गोल्डन जैकाल है। यादव के मुताबिक, "मैंने तुरंत मौके पर पहुंचने का फैसला किया।" यह बात उनके दोस्त के फोन करने वाली सुबह की ही है।
यादव ने मौके पर पहुंचकर वन विभाग के मैंग्रोव सेल को खबर दी। रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर प्रशांत बहादुरे ने फौरन एक टीम रवाना कर दी। यादव के अनुसार वन विभाग के अधिकारी पांच मिनट के अंदर पहुंच गए, रोडकिल का पंचनामा पूरा किया और जानवर के अवशेष अपने कब्ज़े में ले लिए।
यादव ने शहरी इलाकों में जंगली जानवरों के सड़क हादसों में मरने पर अफसोस जताया। उन्होंने गाड़ी चलाने वालों से अपील की कि प्राकृतिक आवास के आसपास से गुज़रते वक्त सावधानी से गाड़ी चलाएं।
गोल्डन जैकाल भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासी हैं और जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में अहम भूमिका निभाते हैं। ये सर्वाहारी होते हैं और छोटे स्तनधारी, पक्षी, मछली, खरगोश और फल खाते हैं। देश में इनकी जंगली आबादी करीब 80,000 आंकी गई है। शिकार, वन्यजीव तस्करी, इंसान और जानवर के बीच टकराव और हाइवे पर हादसे इनके लिए बड़ा खतरा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में छिपकर रहने वाली इनकी ज़िंदगी, खान-पान और शिकार के आधार का बारीकी से अध्ययन ज़रूरी है, ताकि इन्हें बचाने की कोशिशें बेहतर हो सकें।
मुंबई महानगर क्षेत्र में जैकाल की अच्छी आबादी है, जो मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, भांडुप, चारकोप, वर्सोवा, वसई, मीरा-भायंदर और घोड़बंदर रोड के मैंग्रोव इलाकों में रहती है। फिर भी रहने की जगह का खत्म होना, आवारा कुत्ते और सड़क हादसे इनके लिए बड़े खतरे बने हुए हैं।
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