टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की जांच बाबा सिद्दीकी हत्या जैसी, पुलिस को दिखीं कई समानताएं
पुलिस सूत्रों के मुताबिक टाइगर श्रॉफ फायरिंग की साजिश 2024 में हुई बाबा सिद्दीकी की हत्या की हूबहू नकल जैसी है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की जांच में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी की हत्या से कई चौंकाने वाली समानताएं सामने आई हैं। पुलिस सूत्रों ने इस कथित साजिश को 2024 की उस हत्या की "कार्बन कॉपी" बताया है। दोनों मामलों में पहले से रेकी की गई, तीन शूटर थे, उन्हें लॉजिस्टिक मदद मिली और भाग निकलने का इंतजाम भी किया गया था। दोनों वारदातें दशहरे के आसपास हुईं, हालांकि सिर्फ त्योहार का वक्त इन दोनों मामलों को आपस में नहीं जोड़ता।
बाबा सिद्दीकी को 12 अक्टूबर 2024 को दशहरे के दिन बांद्रा ईस्ट में उनके बेटे जीशान सिद्दीकी के दफ्तर के बाहर गोली मारी गई थी। पुलिस ने जांच में देखा कि शूटरों ने हमले से पहले उनकी हर हरकत पर नजर रखी और इलाके से खुद को वाकिफ किया। साजिश रचने वालों की भूमिका भी खंगाली गई, जिन्होंने पूरे ऑपरेशन का तालमेल बिठाया और शूटरों को हमले के लिए तैयार किया।
टाइगर श्रॉफ के मामले में आरोपियों ने जुहू के पुष्पा नरसी पार्क की रेकी की, जहां अभिनेता नियमित रूप से फुटबॉल खेलते थे। आरोपी 11 अक्टूबर को मैदान पर पहुंचे, पर श्रॉफ नहीं आए तो वे लौट गए। फिर वे 18 अक्टूबर को, यानी फायरिंग वाले दिन, दोबारा आए। पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि हमले से पहले श्रॉफ के फुटबॉल खेलने की तस्वीरें और वीडियो एक कथित हैंडलर को भेजे गए थे।
दोनों मामलों में पुलिस ने यह देखा कि निशाने की पहले से निगरानी की गई और उसकी आवाजाही की जानकारी का इस्तेमाल हमले की योजना बनाने में हुआ। जांच सिर्फ वारदात की जगह मौजूद लोगों तक सीमित नहीं है। उस बड़े नेटवर्क की भी पड़ताल हो रही है, जिस पर हमलों में मदद करने का शक है।
सिद्दीकी की हत्या की जांच में तीन शूटरों की पहचान हुई थी: गुरमेल सिंह, धर्मराज कश्यप और शिवकुमार गौतम। श्रॉफ वाले मामले में भी तीन शूटर थे। दो लोगों ने अभिनेता की गाड़ी पर गोलियां चलाईं, जबकि तीसरा मोटरसाइकिल पर इंतजार करता रहा। पुलिस कथित हैंडलरों और ऑपरेशन खड़ा करने में मदद करने वाले बाकी आरोपियों की भूमिका भी देख रही है।
सिद्दीकी की हत्या की जांच में पुलिस ने एक कथित नेटवर्क की पड़ताल की थी, जिसने शूटरों को रहने की जगह, आने-जाने के साधन, पैसे और दूसरे इंतजाम मुहैया कराए। जांच का मकसद यह पता लगाना था कि साजिश रचने वालों ने शूटरों से कैसे तालमेल बिठाया। श्रॉफ मामले में भी जांचकर्ता हमले के पीछे के सपोर्ट नेटवर्क को खंगाल रहे हैं। पुलिस के मुताबिक कई आरोपियों ने हथियार जुटाने और पहुंचाने, ठहरने का इंतजाम करने और दूसरी मदद देने में भूमिका निभाई। शूटरों और उनके कथित हैंडलरों के बीच हुई बातचीत का पता भी लगाया जा रहा है, ताकि साफ हो कि हमले का तालमेल किसने किया।
2024 में सिद्दीकी की हत्या के दिन शूटर वारदात की जगह पर ऑटोरिक्शा से पहुंचे थे, क्योंकि इससे पहले उनकी मोटरसाइकिल को लेकर एक घटना हो चुकी थी। श्रॉफ के मामले में हमलावर जुहू के मैदान में अभिनेता की गाड़ी पर फायरिंग के बाद मोटरसाइकिल से भागे। पुलिस ने बाद में सीसीटीवी फुटेज और दूसरे सुरागों से संदिग्धों का पता लगाया। जांच में उन इंतजामों को भी देखा गया, जो आरोपियों को मुंबई से बाहर निकालने के लिए किए गए थे।
तारीखों पर नजर डालें तो सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या 12 अक्टूबर 2024 को दशहरे के दिन हुई थी। श्रॉफ पर फायरिंग 18 अक्टूबर 2026 को हुई, यानी दशहरे से एक दिन पहले।
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