दिवाली जांच अभियान में महाराष्ट्र FDA ने 105 लाइसेंस निलंबित किए, सात प्रतिष्ठान बंद कराए
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तुकाराम मुंढे की अगुवाई वाले FDA ने 4 और 5 नवंबर को राज्यभर में जांच की। 69 से ज्यादा प्रतिष्ठानों से 1.35 करोड़ रुपये का खाद्य स्टॉक जब्त हुआ।
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने दिवाली से पहले राज्यभर में चलाए गए खाद्य सुरक्षा अभियान के बाद 105 फूड बिजनेस लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। सात प्रतिष्ठानों को बंद करने का आदेश भी दिया गया है। FDA ने शुक्रवार को जारी बयान में यह जानकारी दी। विभाग की कमान तुकाराम मुंढे के हाथ में है।
विभाग के मुताबिक 4 और 5 नवंबर को हुई जांच में 69 से ज्यादा प्रतिष्ठानों से करीब 1.35 करोड़ रुपये का खाद्य स्टॉक जब्त किया गया। बयान में कहा गया है कि 1,35,70,098 रुपये के खाद्य पदार्थ जब्त हुए। इसके अलावा गुटखा जैसे प्रतिबंधित उत्पाद, जिनकी कीमत 7,96,265 रुपये है, अलग से जब्त किए गए। अभियान में तीन FIR दर्ज हुईं, दो लोगों को गिरफ्तार किया गया और दो गाड़ियां जब्त की गईं।
जांच में खाद्य निर्माता, गोदाम, रिटेलर, मिठाई की दुकानें, डेयरी, फरसान यूनिट, होटल, रेस्टोरेंट और कैटरर शामिल थे। FDA का कहना है कि त्योहार के मौसम में लोगों को सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का खाना मिले, यही अभियान का मकसद था।
निलंबित 105 लाइसेंस में सबसे ज्यादा 39 नाशिक डिवीजन में हैं। इसके बाद बृहन्मुंबई में 28, पुणे में 20 और अमरावती में 15 लाइसेंस निलंबित हुए। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में दो और ठाणे में एक लाइसेंस निलंबित किया गया।
बंद कराए गए सात प्रतिष्ठानों में तीन पुणे के, दो अमरावती के, एक बृहन्मुंबई का और एक कोंकण डिवीजन का है। बोरीवली वेस्ट के राजधानी बिरयानी सेंटर को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेसेस) रेगुलेशंस, 2011 के शेड्यूल 4 का उल्लंघन करते पाया गया। भिवंडी के आराधना ड्राईफ्रूट स्वीट्स को बिना वैध लाइसेंस के निर्माण के लिए बंद करने को कहा गया। वहां से 1,780 किलो काजू, काजू कतली, कुंदा और मिठाई बर्फी जब्त की गई।
अमरावती डिवीजन में वाशिम के जय गजानन फरसान को जरूरी रजिस्ट्रेशन के बिना चलते पाया गया। अमरावती के लक्ष्मी बीकानेर को बिना लाइसेंस और गंदगी भरे हालात में चलते पाया गया। दोनों यूनिट बंद करने का आदेश हुआ और लक्ष्मी बीकानेर में 27 किलो पेढ़ा नष्ट किया गया। पुणे में शिक्रापुर के श्री गणेश लड्डूवाले, वानवडी के पौर्णिमा स्वीट्स और बिबवेवाड़ी के सिरवी स्वीट्स को भी बंद करने को कहा गया। FDA ने इन जगहों पर संदिग्ध घटिया या असुरक्षित खाने और साफ-सफाई से जुड़ी गड़बड़ियों का हवाला दिया।
अधिकारियों ने जांच में गंदे माहौल में बनता और रखा जाता खाना, काली या खराब दीवारें और छतें, फर्श पर सीधे रखा माल और गलत पैकिंग देखी। कई जगह खिड़कियों पर जाली, कीट नियंत्रण, तापमान मॉनिटरिंग सिस्टम, फूड सेफ्टी मैनेजमेंट प्लान, पीने के पानी की जांच रिपोर्ट और खाना संभालने वालों के मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं थे। कुछ प्रतिष्ठानों के पास FoSTaC ट्रेनिंग का रिकॉर्ड भी नहीं था।
FDA के मुताबिक जिनके लाइसेंस निलंबित हुए हैं, वे उन लाइसेंस पर खाने का कारोबार नहीं कर सकते। कार्रवाई मिठाई और फरसान बनाने वालों, होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर, घर से चलने वाले फूड बिजनेस और क्विक-कॉमर्स प्रतिष्ठानों पर हुई है।
कुल मिलाकर राज्य के डिवीजनों से लगभग 39,485 किलो खाद्य पदार्थ जब्त हुए, जिनकी कीमत 1.35 करोड़ रुपये है। सबसे ज्यादा कीमत का माल पुणे डिवीजन में जब्त हुआ, यानी करीब 14,429 किलो, 49.36 लाख रुपये का। कोंकण में 6,712 किलो, 32.52 लाख रुपये का और नाशिक में 10,493 किलो, 28.35 लाख रुपये का माल जब्त हुआ। बृहन्मुंबई में 2,396 किलो, 13.87 लाख रुपये का खाना पकड़ा गया। इसमें नागपाड़ा की तहूरा स्वीट्स एंड बेकरी से 42 किलो मावा भी था, जो गंदे हालात में सामान्य तापमान पर रखा था। मालाड की जेठाराम चुनीराम पुनिया से 1,452 किलो मिठाइयां बिना लाइसेंस बनाने और बिना लेबल बेचने पर जब्त हुईं। जो खराब होने वाला माल जनता की सेहत के लिए खतरनाक मिला, उसे पंच गवाहों के सामने मौके पर नष्ट किया गया।
गुटखा, पान मसाला और खुशबूदार तंबाकू जैसे प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण, ढुलाई और बिक्री पर भी कार्रवाई हुई। 4 और 5 नवंबर को तीन जगहों से 7.96 लाख रुपये का माल जब्त हुआ। तीन FIR दर्ज हुईं, दो लोग गिरफ्तार हुए, दो प्रतिष्ठान सील किए गए और कुल 4.70 लाख रुपये की दो गाड़ियां जब्त की गईं। कोंकण में 6.80 लाख रुपये का माल जब्त हुआ और एक FIR दर्ज हुई। पुणे में 86,447 रुपये का माल जब्त हुआ, एक FIR दर्ज हुई और एक गिरफ्तारी हुई। बृहन्मुंबई में 29,268 रुपये का माल जब्त हुआ, एक FIR और एक गिरफ्तारी हुई।
FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने कहा कि दिवाली में नागरिकों को सुरक्षित और अच्छा खाना मिले, यही विभाग की प्राथमिकता थी। उन्होंने चेतावनी दी कि कारोबार छोटा हो या बड़ा ब्रांड, नियम तोड़ने पर कार्रवाई होगी। मुंढे के मुताबिक विभाग का मकसद कारोबारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और नियमों का पालन बढ़ाना है। जो प्रतिष्ठान लोगों की सेहत से समझौता करते मिलेंगे, उन पर लाइसेंस निलंबन या रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई होगी।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 59 के तहत असुरक्षित खाना बेचने पर जेल और जुर्माना हो सकता है। अगर उल्लंघन से किसी की मौत हो जाए तो कम से कम 10 लाख रुपये का जुर्माना है। धारा 63 में बिना लाइसेंस खाने का कारोबार करने पर छह महीने तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना है। धारा 32 के तहत लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जा सकते हैं।
खाने की क्वालिटी या गड़बड़ी की शिकायत टोल-फ्री नंबर 1800222365 या फूड एंड ड्रग ग्रीवांस पोर्टल complaints.mahafda.in पर की जा सकती है।
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