अजय देवगन विमल इलायची मामले में एफडीए की कार्यवाही के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे
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एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने शुक्रवार को बताया कि देवगन ने विज्ञापन पर शुरू हुई कार्यवाही को हाई कोर्ट में चुनौती दी है।
अभिनेता अजय देवगन ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की उस कार्यवाही को चुनौती दी है, जो विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर शुरू की गई थी। एफडीए का आरोप है कि यह विज्ञापन असल में विमल पान मसाला का सरोगेट प्रचार है।
यह जानकारी शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने दी। मुंढे ने कहा, "इनमें से एक, अजय देवगन, हाई कोर्ट पहुंचे हैं।"
मामला इस साल की शुरुआत का है। एफडीए ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापनों के लिए कारण बताओ नोटिस भेजे थे। विभाग का आरोप था कि इन विज्ञापनों के जरिए सरोगेट ब्रांडिंग करके विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रचार किया गया।
नोटिस शाहरुख खान के बांद्रा स्थित घर मन्नत, अजय देवगन के जुहू के बंगले और टाइगर श्रॉफ की प्रोडक्शन कंपनी तक पहुंचाए गए थे। तीनों अभिनेताओं से कहा गया था कि वे 15 दिन के अंदर अपना जवाब दें और अपने सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रमोशन का सारा मटेरियल हटा दें।
मुंढे के मुताबिक तीनों अभिनेताओं ने नोटिस का जवाब दे दिया था और सुनवाई के लिए और वक्त मांगा था। एफडीए के असिस्टेंट कमिश्नर, जो इस कार्यवाही को चलाने के लिए सक्षम अधिकारी हैं, ने यह वक्त दे दिया। असिस्टेंट कमिश्नर अब सुनवाई पूरी कर चुके हैं और उनके स्तर पर कार्यवाही खत्म हो गई है। अब ये मामले फैसले के लिए जॉइंट कमिश्नर के पास भेजे गए हैं।
एफडीए ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 24 और 53 के साथ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए हैं। विभाग का आरोप है कि विज्ञापनों में एक जैसी ब्रांड पहचान, एक जैसे डायलॉग और पेशकश का एक जैसा अंदाज इस्तेमाल हुआ। उसके मुताबिक इससे विमल इलायची के प्रचार के जरिए विमल पान मसाला की भ्रामक ब्रांड याद बन सकती है।
इस तरह अभी स्थिति यह है कि तीनों मामले फैसले के लिए जॉइंट कमिश्नर के सामने हैं, जबकि अजय देवगन ने इस कार्यवाही के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है।
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