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महाराष्ट्र में एक्सपायर्ड खाना दोबारा बेचने का आरोप, FDA ने 5 करोड़ का माल पकड़ा

महाराष्ट्र में एक्सपायर्ड खाना दोबारा बेचने का आरोप, FDA ने 5 करोड़ का माल पकड़ा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 कारोबार डेस्क

FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे के मुताबिक एक्सपायर्ड और खराब खाने की रीसाइक्लिंग पर कार्रवाई शुरू हुई है और डिस्पोज़ल के लिए नया आदेश जारी हुआ है।

महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एक्सपायर्ड, खराब और वापस आए खाने के सामान की गैरकानूनी रीसाइक्लिंग के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि ऐसे सामान को दोबारा पैक करके बाज़ार में बेचा जा रहा था। कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात बताई।

मुंढे ने कहा, "ऐसे सामान को खाने के बाज़ार के चक्र में वापस डालने का सबसे ज़्यादा असर ग्राहकों पर पड़ता है, और हम इस पर रोक लगाने की योजना बना रहे हैं।" उन्होंने कारोबारियों से कहा, "लोगों की सेहत की कीमत पर धंधा मत कीजिए।" साथ ही उन्होंने ऐसे सामान का सही तरीके से निपटारा करने और रिकॉर्ड रखने की अपील की।

FDA के मुताबिक ई-कॉमर्स, क्विक-कॉमर्स और रिटेल कंपनियों के गोदामों में पड़ा एक्सपायर्ड, खराब और ग्राहकों का लौटाया सामान नष्ट करने के लिए डिस्पोज़ल एजेंसियों को दिया जाता था। आरोप है कि कुछ एजेंसियां माल नष्ट किए बिना ही डिस्पोज़ल सर्टिफिकेट जारी कर देती थीं। फिर यह माल बिना लाइसेंस वाले गोदामों में पहुंचता, जहां पैकेजिंग बदली जाती या तारीख़ के निशान बदल दिए जाते थे। उसके बाद माल ब्रोकरों और रिटेलरों के हाथों से होकर ग्राहकों तक पहुंचता, अक्सर कम दाम पर। FDA का कहना है कि ऐसा सामान छोटी दुकानों, खाने-पीने की जगहों और समाज के कमज़ोर आर्थिक तबके तक पहुंचने की ज़्यादा संभावना रखता था।

मुंढे ने बताया कि विभाग ने रिटेल दुकानों से गोदामों तक और उन कंपनियों तक पूरी सप्लाई चेन का पता लगाया है, जहां से माल निकला था। उनके मुताबिक एक्सपायर्ड माल डिस्पोज़ल एजेंसी को थमा देने से निर्माता या कारोबारी की नष्ट करवाने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र भर में ऐसे सिंडिकेट मिले हैं जो माल नष्ट किए बिना फर्ज़ी डिस्पोज़ल रिकॉर्ड रखते हैं। महाराष्ट्र ऐसा आदेश जारी करने वाला देश का पहला राज्य है, यह भी उन्होंने कहा।

कमिश्नर के मुताबिक यह समस्या लगातार चल रही है और त्योहारों के सीज़न में खाने की खपत और मांग बढ़ने से जोखिम बढ़ने की आशंका है। विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में जांच तेज़ कर दी है। मुंढे ने कहा कि निर्माता, गोदाम संचालक, डिस्पोज़ल एजेंसी, ब्रोकर और रिटेलर, जहां भी एक्सपायर्ड या असुरक्षित खाना बाज़ार में मिलेगा, सब जवाबदेह होंगे।

जून से अक्टूबर 2026 के बीच FDA ने पूरे महाराष्ट्र में Rs 5,00,14,040 का माल ज़ब्त किया। सबसे बड़ी ज़ब्ती नवी मुंबई के तुर्भे में Rs 4,12,53,300 की रही, जहां प्रतिष्ठान का लाइसेंस सस्पेंड किया गया और जांच के लिए 32 सैंपल लिए गए।

भिवंडी में कई जगह कार्रवाई हुई। गुलज़ार नगर में खाद्य सुरक्षा और मानक कानून की धारा 38 के तहत Rs 80,575 का माल पकड़ा गया। चविंद्रा में Rs 86,825 का माल ज़ब्त हुआ और बिना लाइसेंस चलने की वजह से प्रतिष्ठान को काम बंद करने का निर्देश दिया गया। खोनी और कांबा में रिकॉर्ड की गड़बड़ियों और कमियों पर Rs 26,60,792 का माल ज़ब्त हुआ, आगे की कार्रवाई जारी है। वडपे के दो प्रतिष्ठानों में Rs 4,91,848 और Rs 51,264 का माल पकड़ा गया और दोनों के लाइसेंस 15 अक्टूबर 2026 को सस्पेंड हुए।

पगांव में Rs 32,71,774 का माल ज़ब्त हुआ, लाइसेंस 22 अक्टूबर को सस्पेंड हुआ और FIR (0817/2026) दर्ज हुई। पडघा में Rs 6,88,042 का माल पकड़ा गया, लाइसेंस 26 अक्टूबर को सस्पेंड हुआ और FIR (0454/2026) दर्ज हुई। भिवंडी के बाहर अंबरनाथ के उसाटणे में Rs 7,80,620 का माल ज़ब्त हुआ और लाइसेंस 15 अक्टूबर को सस्पेंड हुआ। पुणे ज़िले के चाकण और निघोजे में Rs 6,49,000 का माल पकड़ा गया और लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश दिए गए।

FDA के मुताबिक इन मामलों में दर्ज सात अपराधों में 34 आरोपियों के नाम हैं, जिनमें व्यक्ति और संस्थाएं दोनों शामिल हैं। जांच के दायरे में बड़ी कंपनियों के डायरेक्टर, गोदाम मैनेजर, डिस्पोज़ल एजेंसियां, ब्रोकर और विक्रेता हैं। सातों मामलों की जांच चल रही है। विभाग का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ़ बेचने वाले रिटेलरों तक नहीं रहेगी, बल्कि उन गोदामों और कंपनियों तक जाएगी जहां से माल निकला।

जांच में अधिकारियों को कई गड़बड़ियां मिलीं। एक्सपायर्ड और लौटाए गए माल के लिए अलग, ताले वाला क्वारंटीन एरिया नहीं था। एक्सपायर घोषित माल और असल में नष्ट किए गए माल के बीच मिलान नहीं था। कुछ कारोबारियों ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) की मंज़ूरी के बिना डिस्पोज़ल एजेंसी लगा रखी थी, तो कुछ ने माल बिना लाइसेंस वाली संस्थाओं को दे दिया। कुछ मामलों में भेजने वाला और पाने वाला एक ही निकला, और कथित तौर पर जिस दिन माल राज्यों के बीच भेजा गया, उसी दिन उसका नष्ट होना दर्ज दिखाया गया। कार्टन की गिनती और दर्ज वज़न में भी फर्क मिला। एक मामले में ऐसी संस्था के नाम इनवॉइस बना था जिसका अस्तित्व ही नहीं था। कारोबारी नष्ट करने का कोई स्वतंत्र सबूत, जैसे गाड़ी की आवाजाही का रिकॉर्ड, वेब्रिज पर्ची, ई-वे बिल या वीडियो, नहीं दे पाए। विभाग ने कहा कि बिना सबूत के डिस्पोज़ल सर्टिफिकेट को भरोसेमंद प्रमाण नहीं माना जा सकता।

नया आदेश पूरे राज्य में गोदामों, फुलफिलमेंट सेंटरों, डार्क स्टोर, डिपो, कोल्ड स्टोरेज और खाने का सामान संभालने वाले डिस्ट्रीब्यूटरों पर लागू होगा। कारोबारियों को एक्सपायर्ड, खराब और लौटाए गए माल के लिए CCTV की निगरानी में अलग, ताले वाला क्वारंटीन एरिया रखना होगा। वहां "Not fit for human consumption" लिखा बोर्ड लगाना होगा और रखे माल का रोज़ का रजिस्टर बनाना होगा।

निपटारे के लिए भेजने से पहले पैकेट काटे या कुचले जाएंगे ताकि दोबारा बेचे या इस्तेमाल न हो सकें। निपटारा सिर्फ़ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मंज़ूर सुविधाओं के ज़रिए होगा। डिस्पोज़ल करार नामित अधिकारी को देने होंगे और हर छह महीने में उनका सत्यापन होगा। 50 किलो या उससे ज़्यादा खाना नष्ट करने के लिए फूड सेफ्टी ऑफिसर को सात दिन पहले नोटिस देना होगा, साथ में ई-वे बिल, GPS रिकॉर्ड और वेब्रिज पर्ची देनी होगी।

नष्ट करने की प्रक्रिया दो स्वतंत्र गवाहों के सामने जियो-टैग वीडियो में रिकॉर्ड करनी होगी। नष्टीकरण प्रमाणपत्र में माल की मात्रा और बैच नंबर का सही ब्योरा होना चाहिए। हर महीने मैटेरियल-बैलेंस रिकॉर्ड भी रखना होगा, जिसमें दिखे कि कितना खाना एक्सपायर हुआ और कितना असल में नष्ट हुआ। गलत जानकारी देने पर धारा 61 के तहत Rs 10 lakh तक का जुर्माना लग सकता है।

आदेश में हर गोदाम के और कंपनी मुख्यालय के नामित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है। एक्सपायरी तारीख़ मिटाना, तारीख़ के ऊपर दोबारा छापना या स्टिकर से तारीख़ छिपाना या बदलना मना होगा। ऐसा छेड़छाड़ वाला खाना असुरक्षित माना जाएगा और धारा 59 के तहत मुकदमा चल सकेगा। पालन पक्का करने के लिए फूड सेफ्टी ऑफिसर हर महीने कम से कम 10 per cent डिस्पोज़ल खेपों का मौके पर सत्यापन करेंगे और माल को गोदाम से नष्ट करने की जगह तक ट्रैक करेंगे।

FDA ने कहा कि जहां भी एक्सपायर्ड खाना बाज़ार में मिलेगा, वहां लाइसेंस सस्पेंड होंगे, जुर्माना लगेगा और मुकदमा चलेगा। सभी कंपनियों को 30 दिन के भीतर अपने डिस्पोज़ल करार और अपने पास पड़े एक्सपायर्ड माल का ब्योरा देने को कहा गया है। विभाग के मुताबिक सात प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड हैं और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई हैं। तय शर्तों का पूरा पालन जांचने के बाद ही लाइसेंस बहाल होंगे।

विभाग ने कहा कि एक्सपायरी के बाद खाने को सुरक्षित नहीं माना जा सकता, और इसके लिए Food Safety and Standards (Labelling and Display) Regulations के Regulation 2(1)(u) का हवाला दिया। खराब पैकेजिंग से खाने में संक्रमण का खतरा भी रहता है। जांच में लिए गए सैंपल लैब भेजे गए हैं और रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी। ज़ब्त माल FSSAI की 3 नवंबर 2025 की गाइडलाइंस के मुताबिक वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाएगा, जांच अधिकारियों की सहमति से, वीडियो रिकॉर्डिंग और गवाहों की मौजूदगी में। FDA के अनुसार यह मुहिम महाराष्ट्र के दूसरे ज़िलों तक बढ़ाई जाएगी और सभी नामित अधिकारियों को गोदामों और डिस्पोज़ल सुविधाओं के रजिस्टर बनाकर नियमित जांच करने को कहा गया है।

FDA ने ग्राहकों से कहा है कि पैकेट वाला खाना खरीदने से पहले बनने की तारीख़, Best Before या Use By तारीख़, बैच नंबर और पैकेजिंग की हालत देख लें। जिन प्रोडक्ट पर तारीख़ मिटी हो, धुंधली हो या स्टिकर से ढकी हो, उन्हें न खरीदने की सलाह दी गई है। शिकायत FDA की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-222-365 पर या ऑनलाइन पोर्टल https://complaints.mahafda.in पर दर्ज की जा सकती है।

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