मुंबई के 29,000 सफाई कर्मचारियों को मिलेगा अपना घर, पंचशील नगर में 140 फ्लैट की चाबियां सौंपीं, फडणवीस का ऐलान
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कोलाबा के पंचशील नगर में 140 फ्लैटों की चाबियां सौंपने के कार्यक्रम में कहा कि सफाई कर्मचारियों को सर्विस क्वार्टर के साथ मालिकाना हक वाले घर भी दिए जाएंगे।
मुंबई को साफ रखने वाले सफाई कर्मचारियों के लिए दिवाली के आसपास एक राहत भरी खबर आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार इन कर्मचारियों को सिर्फ सर्विस क्वार्टर ही नहीं देगी, बल्कि ऐसे घर भी देगी जिनके वे खुद मालिक होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि मुंबई के सभी सफाई कर्मचारियों को 2028 तक सेवा निवास मिल जाएंगे। BMC ने इनकी बस्तियों को हिस्सों में तोड़कर नए सिरे से बनाने का काम शुरू कर दिया है और मकसद है कि कर्मचारियों का रहन-सहन बेहतर हो।
यह ऐलान कोलाबा के पंचशील नगर में हुआ, जो राजवाडकर स्ट्रीट पर है। यहां BMC की आश्रय योजना के दूसरे चरण में दो इमारतें खड़ी की गई हैं, जिनमें कुल 140 नए फ्लैट हैं। हर फ्लैट 300 वर्ग फुट का है और उसमें अलग बाथरूम व शौचालय है। इन फ्लैटों का उद्घाटन हुआ और कुछ कर्मचारियों को चाबियां थमाई गईं। कार्यक्रम की शुरुआत फीता काटने से हुई, उसके बाद सबने नई इमारतों को घूमकर देखा। पांच सफाई कर्मचारियों को प्रतीक के तौर पर चाबियां दी जानी थीं। लाभार्थियों में भारती धोत्रे, सचिन सोलंकी, वंदना गोरेगांवकर, श्यामसिंह वाल्मीकि, प्रशांत सावंत और सतीश मार्चंडे के नाम बताए गए।
मंच पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, मुंबई की मेयर ऋतु तावडे और BMC आयुक्त अश्विनी भिडे मौजूद थे। इनके अलावा और भी नागरिक और राजनीतिक प्रतिनिधि आए थे। फडणवीस ने मेयर, डिप्टी मेयर और आयुक्त को बधाई दी और कहा कि नगर निगम ने अच्छा काम किया है।
फडणवीस ने पुरानी हालत याद दिलाई। आश्रय योजना के तहत बरसों से ये कर्मचारी 150 वर्ग फुट के जर्जर मकानों में रह रहे थे, जहां सामूहिक शौचालय था और कई बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। उनके शब्दों में ऐसे घर दड़बे जैसे थे। उन्होंने कहा कि मुंबई का नगर निगम एशिया के अमीर नगर निगमों में गिना जाता है, ऐसे में उसके अपने कर्मचारी इन हालात में रहें, यह गर्व की बात नहीं। आज का नजारा देखकर उन्हें लगा कि इसका हल निकल आया है और अच्छी जिंदगी देने की शुरुआत हो चुकी है। अब इन कर्मचारियों को 300 वर्ग फुट का घर मिल रहा है। फडणवीस ने साफ कहा कि आगे सफाई कर्मचारियों को अपने घर की फिक्र नहीं करनी पड़ेगी।
इमारत की तकनीक पर भी मुख्यमंत्री ने बात की। यह BMC की पहली इमारत है जो प्री-फैब्रिकेटेड तकनीक से बनी है। अब तक यह तकनीक ज्यादातर बड़ी निजी इमारतों में ही इस्तेमाल होती थी। फडणवीस के मुताबिक इमारत की उम्र करीब 100 साल आंकी गई है और निर्माण मजबूत है। परिसर में 30 से 40 प्रतिशत जगह खुली छोड़ी गई है, साझा सुविधाएं हैं और एक सामूहिक हॉल भी है। देखरेख का जिम्मा दस साल तक डेवलपर का रहेगा, यानी कर्मचारी रहने आ जाएं तो दस साल तक उन्हें किसी चीज की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।
सफाई कर्मचारियों के बारे में फडणवीस ने कहा, "सफाई कर्मचारी अपनी सेहत को पहले रखे बिना मुंबईवासियों की सेहत का ख्याल रखते हैं। उन्हें बड़े और अच्छे घर देना सरकार की जिम्मेदारी है।" उन्होंने कहा कि इनकी मेहनत का फायदा आखिर में मुंबई के लोगों को ही मिलता है।
राहुल नार्वेकर का नाम लेकर मुख्यमंत्री ने उन्हें भी बधाई दी। फडणवीस का कहना था कि ऐसी योजनाओं में रुकावटें आती ही हैं, और उन्हें हटाने में नार्वेकर ने बड़ी मदद की। उनके बिना इस काम में दो-तीन साल और लग सकते थे।
फडणवीस ने लाड-पागे समिति का इतिहास भी बताया। यह समिति 1973 में बनी थी, जो सफाई कर्मचारियों की दिक्कतें देखने के लिए थी। बाद में अदालत के एक फैसले से उसका काम रुक गया। 2015 में सरकारी प्रस्ताव के जरिए उसे फिर चालू किया गया और वंशानुगत यानी वारिस वाली नियुक्ति की व्यवस्था लौट आई। इसमें कर्मचारियों के बच्चों को जरूरी पढ़ाई-लिखाई होने पर क्लास III की नौकरी दी जाती है। जब फिर अड़चनें आईं तो सरकार अदालत में लड़ी, समिति की सिफारिशें लागू कराने की कानूनी लड़ाई जीती और कर्मचारियों के अलग हक कायम रखे गए। न्यूनतम वेतन तय करने पर भी फैसला हुआ। ठेके पर, दिहाड़ी पर और substitute मजदूर के तौर पर काम करने वालों को भी न्यूनतम वेतन और बाकी सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा सरकार ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर श्रम साफल्य योजना और वाल्मीकि आवास योजना भी शुरू की हैं। मौजूदा सर्विस मकान की व्यवस्था में अगर किसी कर्मचारी की जगह उसका बेटा नौकरी पर लगता है, तो मकान भी बेटे के नाम हो जाता है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि BMC के 29,000 सफाई कर्मचारियों को सर्विस क्वार्टर देने की मुहिम का पहला चरण शुरू हो चुका है। मुंबई में सफाई कर्मचारियों की 146 कॉलोनियों को चरणबद्ध तरीके से नया बनाया जाएगा। 150 वर्ग फुट के मौजूदा मकान की जगह अब 300 वर्ग फुट के घर मिलेंगे। काम जल्दी निपटे, इसलिए BMC ने प्री-फैब्रिकेटेड तकनीक अपनाई है।
शिंदे ने सफाई कर्मचारियों को मुंबई के असली हीरो कहा। कोविड-19 की महामारी हो या मानसून की बारिश, शहर को साफ रखने में उनका योगदान उन्होंने याद किया। शिंदे ने कहा कि कई कर्मचारी मुंबई से बाहर रहते हैं और रोज लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं, जिसका असर उनकी सेहत और काम करने की ताकत पर पड़ता है। शहर के भीतर घर मिलने से उनकी जिंदगी आसान होगी और मुंबई और साफ व सेहतमंद बनेगी। उन्होंने BMC से कहा कि कर्मचारियों के बच्चों की ऊंची पढ़ाई के लिए अलग योजना बनाई जाए, ताकि वे मेडिकल, इंजीनियरिंग, कानून और आर्किटेक्चर जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ सकें।
नार्वेकर ने कहा कि पंचशील नगर के 140 फ्लैटों की चाबियां देना मुंबई के 29,000 सफाई कर्मचारियों को घर देने की मुहिम की शुरुआत है। उनके मुताबिक जो लोग शहर को साफ और सेहतमंद रखते हैं, उन्हें इज्जत का घर देने की दिशा में यह अहम कदम है। उन्होंने बताया कि दो इमारतों में ये 140 फ्लैट हैं, 10 लिफ्ट लगी हैं और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी हैं। परिसर साफ-सुथरा है, बच्चों के पढ़ने के लिए जगह है और अलग-अलग गतिविधियों के लिए भी जगह रखी गई है।
आंकड़ों में देखें तो BMC की आश्रय योजना के तहत तीन चरणों में 35 प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनसे सफाई कर्मचारियों की 30 कॉलोनियों का पुनर्विकास हो रहा है। इसमें 300 वर्ग फुट के 11,371 घर और 600 वर्ग फुट के 773 घर हैं, यानी कुल 12,144 घर। महानगरपालिका का लक्ष्य है कि उसके सभी 29,000 सफाई कर्मचारियों को सर्विस मकान मिल जाएं।
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