गोकुल विवाद पर राज ठाकरे का BJP से सवाल, सत्ता में रहकर "लोकतंत्र बचाओ" मार्च क्यों
राज ठाकरे ने गोकुल दूध संघ के विवाद को लेकर भाजपा के देशव्यापी "लोकतंत्र बचाओ" मार्च पर सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के देशभर में चल रहे "लोकतंत्र बचाओ" मार्च पर सवाल खड़े किए। कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ, यानी गोकुल डेयरी, के ताजा विवाद के बाद उन्होंने पूछा कि सत्ताधारी पार्टी लोकतंत्र के उसूलों को कितना मानती है।
ठाकरे का आरोप है कि भाजपा एक तरफ लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर प्रदर्शन कर रही है और दूसरी तरफ सरकारी फैसलों के जरिए स्थानीय सहकारी चुनावों के नतीजे को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने गोकुल डेयरी के हाल के बोर्ड चुनाव का जिक्र किया। इस चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के समर्थन वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं, जबकि महायुति के समर्थन वाले पैनल को 12 सीटें मिलीं।
अपने बयान में ठाकरे ने पूछा कि जो पार्टी कई स्तरों पर सत्ता में है, वह विपक्ष के खिलाफ लोकतंत्र बचाने के नाम पर मार्च क्यों निकाल रही है। उन्होंने कहा, "भाजपा वाकई अजीब पार्टी है। ऊपर से नीचे तक सत्ता में होने के बावजूद वह 'लोकतंत्र बचाने' के लिए मार्च निकाल रही है। दुनिया में यह शायद अकेला उदाहरण होगा, जहां सत्ताधारी पार्टी विपक्ष के खिलाफ मार्च निकालती है।"
इस अभियान पर तंज कसते हुए उन्होंने भाजपा की अपील की तुलना "KFC के मशहूर लोगो वाले शुभंकर के मुर्गियां बचाने के लिए प्रचार करने" से की। उनका यह भी आरोप था कि दस साल से ज्यादा सत्ता में रहने के बाद भी भाजपा विपक्ष जैसा बर्ताव कर रही है।
ठाकरे ने गोकुल के नतीजों का हवाला देकर सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसमें सहकारी संस्थाओं में नियुक्तियों के नियम बदले गए हैं। महाराष्ट्र कैबिनेट ने संशोधन को मंजूरी दी है, जिसके तहत 500 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना टर्नओवर वाली सहकारी संस्थाओं के बोर्ड में सरकार पांच सदस्य नामित कर सकेगी। इनमें से चार को वोट देने का अधिकार होगा, जबकि पांचवां सरकारी प्रतिनिधि होगा और उसके पास वोट का अधिकार नहीं होगा।
ठाकरे ने इस फैसले की टाइमिंग पर सवाल किया और आरोप लगाया कि इससे गोकुल के चुने हुए निदेशकों को मिला जनादेश कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा, "अगर आपको लोकतंत्र की जड़ें बचाने की इतनी ही तीव्र इच्छा है, तो गोकुल के मामले में आपके भाजपा पैनल के 12 सदस्य हारे और सत्यजित पाटिल के पैनल के 13 सदस्य चुने गए, उसके तुरंत बाद महाराष्ट्र सरकार से 5 निदेशक नियुक्त करके उन्हें वोट देने का अधिकार क्यों दिया? आखिर आप क्या साबित करना चाहते हैं?" उनका आरोप है कि महायुति समर्थित पैनल बहुमत नहीं पा सका, तो सरकार प्रशासनिक दखल से डेयरी पर कब्जे की कोशिश कर रही है।
शासन के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा को घेरा। ठाकरे ने कहा, "इस वक्त महाराष्ट्र में पानी का भीषण सूखा और भाजपा में समझदारी का भीषण सूखा, दोनों एक साथ चल रहे हैं। हैरानी की बात है कि ऐसा हो कैसे सकता है!" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अपनी सरकार की नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए प्रदर्शन करती है, और आतंकवाद तथा अर्थव्यवस्था पर चलाए गए अभियानों का उदाहरण दिया।
ठाकरे ने सत्ताधारी पार्टी से कहा कि वह चुनावी झटके कबूल करे, खुद को पीड़ित बताने की कोशिश न करे। उनके शब्द थे, "भाजपा को सहानुभूति बटोरने का खेल बंद करना चाहिए। आपने जिस भी रास्ते से वह बहुमत हासिल किया, सभी विपक्षी पार्टियों ने 12 साल तक उसे झेला है। अब अगर इस देश की जनता विपक्षी पार्टियों की तरफ झुकने लगी है, तो भाजपा को भी इसे सहना सीखना चाहिए।"
इस बीच कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने 9 नवंबर को कोल्हापुर में विरोध मार्च का ऐलान किया है। मार्च दसरा चौक से शुरू होकर जिला कलेक्टर दफ्तर तक जाएगा। पाटिल का आरोप है कि उनका पैनल चुनाव जीता, फिर भी नामित निदेशक नियुक्त करने का सरकारी फैसला गोकुल पर कब्जे की कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा है कि उनका पक्ष इस फैसले को कानूनी चुनौती देना जारी रखेगा।
राज्य के मंत्री हसन मुश्रीफ ने सरकार के कदम का बचाव किया। उनके मुताबिक यह फैसला चेयरमैन के चुनाव पर बने गतिरोध को खत्म करने और प्रशासक की नियुक्ति से बचने के लिए लिया गया। मुश्रीफ ने बताया कि गोकुल के उपनियमों के हिसाब से चेयरमैन चुनने के लिए 14 निदेशकों की गणपूर्ति जरूरी है। महायुति समर्थित पैनल के 12 निदेशक पिछली बैठक में नहीं आए, इसलिए गणपूर्ति पूरी नहीं हो सकी।
मुश्रीफ का कहना था कि बैठक बार-बार न हो पाई तो प्रशासक बैठाना पड़ सकता है और नए सिरे से चुनाव कराने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसलिए दखल दिया, ताकि संस्था प्रशासक के बजाय चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में रहे।
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