मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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21:06 IST

डीजे-लाउडस्पीकर के लिए अब सिक्योरिटी डिपॉजिट अनिवार्य, हाई कोर्ट का बड़ा आदेश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने त्योहारों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साउंड पॉल्यूशन रोकने के लिए लाउडस्पीकर की परमिशन देने से पहले डिपॉजिट जमा कराने का निर्देश दिया है।

डीजे-लाउडस्पीकर के लिए अब सिक्योरिटी डिपॉजिट अनिवार्य, हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

राज्य में त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक सभाओं के दौरान होने वाले साउंड पॉल्यूशन पर लगाम कसने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम या उत्सव में लाउडस्पीकर बजाने की परमिशन देने से पहले संबंधित मंडल से एक लाख रुपये की डिपॉजिट रकम जमा करवाई जाए।

खास बात यह है कि यह शर्त सिर्फ सार्वजनिक मंडलों तक सीमित नहीं है। अगर कोई व्यक्ति निजी तौर पर भी लाउडस्पीकर या डीजे बजाने की परमिशन मांगता है, तो उससे भी 50 हजार रुपये का डिपॉजिट लिया जाएगा। हाई कोर्ट के इस आदेश से बिना वजह या नियमों को तोड़कर लाउडस्पीकर बजाने वालों को अच्छा-खासा झटका लगा है।

कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, लाउडस्पीकर बजाने की परमिशन देते वक्त प्रशासन आवाज की एक सीमा तय करेगा और लाउडस्पीकर उन्हीं शर्तों के हिसाब से बजाने की इजाजत मिलेगी। हर आयोजक के लिए इन शर्तों का पालन करना जरूरी होगा। अगर किसी मंडल या आयोजक ने तय की गई आवाज की सीमा तोड़ी, तो उनका जमा डिपॉजिट जब्त कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं, ऐसे आयोजकों पर ध्वनि प्रदूषण रोकथाम कानून के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

इसके अलावा, धार्मिक त्योहारों और उत्सवों के दौरान जुलूसों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल, पटाखे फोड़ने और लेजर लाइट के इस्तेमाल को लेकर भी बॉम्बे हाई कोर्ट में अहम आदेश दिए जाने हैं। जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच के सामने होने वाली सुनवाई पर पूरे राज्य की नजर है। मंगलवार, 22 सितंबर की सुनवाई में हाई कोर्ट ने संकेत दिया था कि धार्मिक त्योहारों और जुलूसों के दौरान सार्वजनिक जगहों पर पटाखे फोड़ने पर पाबंदी लगाई जा सकती है, साथ ही लेजर लाइट के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त फैसला लिया जा सकता है।

पुलिस और प्रशासन के सामने इस आदेश को लागू करना आसान नहीं होगा। विसर्जन से ठीक एक दिन पहले यह आदेश आने की वजह से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ में आखिरी वक्त पर यह नियम लागू करना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। लेजर लाइट, लाउडस्पीकर और सिलेंडर का इस्तेमाल रोकने के लिए जुलूस के पूरे रास्ते पर लगातार निगरानी रखनी होगी। साथ ही नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करते वक्त उत्सव समिति और कार्यकर्ताओं से टकराव टालते हुए शांति बनाए रखना भी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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