मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:30 IST

डॉल्बी जब्ती को लेकर सातारा में सांसद उदयनराजे और पालकमंत्री देसाई आमने सामने

गणेश विसर्जन के बाद डीजे-डॉल्बी की जप्ती को लेकर सातारा में सियासी बहस, वहीं बुजुर्गों ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ मौन मोर्चा निकाला।

डॉल्बी जब्ती को लेकर सातारा में सांसद उदयनराजे और पालकमंत्री देसाई आमने सामने
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

सातारा में गणेश विसर्जन के जुलूस तो खत्म हो गए हैं, लेकिन डीजे-डॉल्बी के शोर पर सियासत अभी थमी नहीं है। ध्वनि प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन होने पर पुलिस ने जो कार्रवाई की, उस पर खासदार उदयनराजे भोसले ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने डॉल्बी व्यवसायियों का पक्ष लेते हुए प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। दूसरी तरफ पालकमंत्री शंभूराज देसाई ने कहा है कि कानून का उल्लंघन होने पर कार्रवाई तो होगी ही, लेकिन अगर बिना नियम तोड़े भी कार्रवाई हुई हो, तो इसकी जांच कराई जाएगी। इस तरह डॉल्बी पर हुई कार्रवाई को अब सियासी रंग मिल गया है।

गणेश विसर्जन के दौरान सातारा शहर में ध्वनि प्रदूषण के नियम लागू कराने के लिए पुलिस ने डीजे-डॉल्बी सिस्टम की जांच की थी। जिन सिस्टम ने तय ध्वनि सीमा का उल्लंघन किया, उन पर कार्रवाई हुई और कुछ डॉल्बी सामान जब्त कर लिया गया। इसके बाद डॉल्बी व्यवसायियों ने उदयनराजे भोसले से मिलकर अपनी बात रखी।

उदयनराजे ने इस मौके पर कार्रवाई के तरीके पर ही सवाल उठाया। उनका कहना है कि डॉल्बी का काम करने वाले बहुत से लोग रोजी-रोटी के लिए यह धंधा करते हैं। उन्होंने पूछा कि अगर इन लोगों के पास रोजगार का कोई और जरिया होता, तो क्या वे यह काम करते? उदयनराजे ने यह भी कहा कि जब्त किए गए डॉल्बी सामान को छुड़ाने के लिए वे पुलिस प्रशासन से बात करेंगे।

उदयनराजे के इस रुख के बाद डॉल्बी पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा सियासी चर्चा में आ गया, तभी पालकमंत्री शंभूराज देसाई ने प्रशासन का पक्ष साफ किया। देसाई ने बताया कि आवाज की जो सीमा तय है वह सरकार ने ही निर्धारित की है, और उसे मापने के लिए पुलिस के पास ध्वनि मापक यंत्र मौजूद है। मापने पर अगर सीमा का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियम के मुताबिक कार्रवाई की जाती है, यह देसाई ने स्पष्ट किया।

देसाई ने आगे कहा कि अगर किसी डॉल्बी सिस्टम ने तय सीमा नहीं तोड़ी थी और फिर भी सबूतों के साथ यह सामने आता है कि उस पर कार्रवाई हुई, तो विसर्जन जुलूसों की पूरी प्रक्रिया खत्म होने के बाद इस मामले की पूरी जांच कराई जाएगी। इससे "नियमों का पालन या कार्रवाई में ज्यादती?" इस मुद्दे पर सियासी बहस शुरू हो गई है।

इस बीच जब डॉल्बी कार्रवाई पर सियासी आरोप-प्रत्यारोप चल रहे थे, तभी सातारा में बुजुर्ग नागरिकों ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ मौन मोर्चा निकालकर अपनी अलग बात रखी। बुजुर्ग डॉक्टरों समेत नागरिकों ने हाथों में विरोध के बोर्ड लेकर डीजे-डॉल्बी की कर्णभेदी आवाज के साथ-साथ लेजर लाइट के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने की मांग की। मोर्चे में यह बात उठाई गई कि ध्वनि प्रदूषण की सबसे ज्यादा तकलीफ बुजुर्गों, मरीजों और छोटे बच्चों को होती है, और त्योहार मनाने का हक होते हुए भी इसमें दूसरे लोगों की सेहत और कानूनी सीमाओं का ध्यान रखना जरूरी है।

बुजुर्ग नागरिकों ने पुलिस की भी तारीफ की, क्योंकि पुलिस ने तय सीमा से ज्यादा आवाज करने वाले डीजे पर कार्रवाई का जो वादा किया था, उसे निभाया। एक तरफ डॉल्बी व्यवसायियों की रोजी-रोटी का मुद्दा सियासी स्तर पर उठा है, तो दूसरी तरफ नागरिकों की सेहत और कानून के पालन का सवाल भी सामने आ गया है। गणेशोत्सव का जोश तो कम हो गया है, लेकिन डॉल्बी पर हुई कार्रवाई से उठा यह विवाद अब सातारा की सियासी और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है।

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