नंदुरबार में कम बारिश, मुश्रीफ ने भूजल बढ़ाने वाले जलसंधारण के काम पहले करने को कहा
नंदुरबार जिले में इस साल औसत से कम बारिश हुई है। पालकमंत्री हसन मुश्रीफ ने सूखे और पानी की किल्लत से निपटने के निर्देश दिए।
नंदुरबार जिले में इस साल औसत से कम बारिश हुई है और वहां सूखे जैसे हालात बन गए हैं। आने वाली पानी की किल्लत से निपटने के लिए चिकित्सा शिक्षा मंत्री और जिले के पालकमंत्री हसन मुश्रीफ ने प्रशासन से कहा है कि भूजल स्तर बढ़ाने वाले जलसंधारण के कामों को पहले हाथ में लिया जाए।
जिले में सूखे के हालात और उसके लिए किए जा रहे उपायों की समीक्षा के लिए पालकमंत्री मुश्रीफ की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें बारिश, जलजीवन मिशन, खेती की स्थिति, फसलों के पंचनामे, चारा और रोजगार के कामों का जायजा लिया गया।
नंदुरबार जिले में बारिश का औसत ८६०.४० मि.मी. है। लेकिन इस साल अब तक सिर्फ ४२४.१० मि.मी. बारिश हुई है, यानी औसत की ४९ टक्के। तालुका के हिसाब से देखें तो अक्राणी में ३९.७० टक्के, तळोदा में ४०.६० टक्के और नंदुरबार तालुका में ४१.४० टक्के बारिश दर्ज की गई है। इसलिए कम बारिश वाले गांवों में जरूरी उपाय असरदार तरीके से लागू करने को कहा गया।
मुश्रीफ ने कहा कि गर्मी की वजह से प्राकृतिक जलस्रोत और भूजल स्तर नीचे जा रहा है। इसलिए आगे की पानी की किल्लत को देखते हुए पीने के पानी का सही नियोजन अभी से किया जाए। टैंकर, पानी के भंडार और मौजूद जलस्रोतों का नियोजन भी आज से ही शुरू करने की सूचना दी गई। जरूरत पड़ने पर टैंकर की व्यवस्था करने के साथ छोटे टैंकर खरीदने की योजना बनाने को भी कहा गया।
उन्होंने साफ किया कि अनधिकृत पानी उपसे पर सख्त पाबंदी लगाई जाए और जो पानी का भंडार है उसका एक-एक बूंद सोच-समझकर इस्तेमाल हो। जिला नियोजन विकास निधि से जो काम हाथ में लिए जाएंगे, उनमें जलव्यवस्थापन और जलसंधारण को खास तरजीह देने की सूचना भी दी गई।
खरीफ सीजन २०२६ में जिन तालुकों में 'ट्रिगर-१' लागू हुआ है, वहां सूखे से बर्बाद फसलों के पंचनामे सबसे पहले पूरे करने को कहा गया। किसानों को जरूरी मदद और पानी मुहैया कराने पर जोर दिया गया। सूखे के दौरान जानवरों के लिए पर्याप्त चारा और वैरण उपलब्ध कराने को भी प्राथमिकता देने के निर्देश हैं।
मजदूरों का पलायन रोकने के लिए ग्रामपंचायत के हिसाब से रोजगार के काम बड़े पैमाने पर शुरू करने को कहा गया है। मुश्रीफ ने कहा कि रोजगार हमी योजना में जलसंधारण, जल भंडार और भूजल स्तर बढ़ाने वाले काम लिए जाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को काम मिल सके।