नागपुर हाई कोर्ट सख्त: सड़कों पर डीजे-लेजर लाइट-पटाखों पर पूरी तरह रोक, जिम्मेदारी पुलिस अफसरों पर
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने त्योहारों-जुलूसों में डीजे, लेजर लाइट और पटाखों पर बैन लगाया, नियम टूटे तो पुलिस अफसर होंगे जवाबदेह।
नागपुर जिले में त्योहारों और जुलूसों के दौरान सड़कों पर डीजे के शोर, लेजर-बीम लाइट और आतिशबाजी से हो रहे ध्वनि और वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस उर्मिला जोशी फालके और जस्टिस राज वाकोडे की बेंच ने सार्वजनिक जगहों पर डीजे, साउंड सिस्टम, लेजर-बीम लाइट और पटाखों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर इन नियमों का उल्लंघन हुआ तो इसके लिए सीधे पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त और उस इलाके के कनिष्ठ पुलिस अफसरों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। बुधवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को इस बारे में औपचारिक अधिसूचना जारी करने का आदेश भी दिया।
सुनवाई के दौरान बेंच ने हाई कोर्ट की दूसरी बेंच द्वारा ध्वनि प्रदूषण पर पहले अपनाई गई सख्ती का हवाला दिया और नियमों को कड़ाई से लागू कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने डीजे मालिकों और आयोजक मंडलों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई करने को कहा और साफ किया कि इस मामले में किसी तरह की ढिलाई या कन्फ्यूजन बर्दाश्त नहीं होगी।
अदालत ने कहा कि जुलूसों में लगने वाली तेज लेजर और हाई-इंटेंसिटी बीम लाइट से लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। सुनवाई में यह भी सामने आया कि डीजे के बहुत तेज शोर से एक बच्चे की सुनने की क्षमता चली गई, वहीं तेज लेजर बीम से कई लोगों की आंखों को नुकसान पहुंचा है। जस्टिस उर्मिला जोशी फालके और जस्टिस राज वाकोडे ने कहा कि कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ ध्वनि और वायु प्रदूषण रोकने के लिए हर नागरिक को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
इसी सुनवाई में नागपुर के रामनगर इलाके के बाजीप्रभु नगर में रहने वाले एडवोकेट अथर्व खडसे ने एक अलग आवेदन दायर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कंस्ट्रक्शन कंपनी रात 10 बजे के बाद भी भारी मशीनरी, ड्रिलिंग मशीन, कंक्रीट मिक्सर और कटर चलाती है, जिससे आसपास रहने वालों की नींद खराब होती है और सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
खडसे ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय पुलिस से शिकायत करने पर 112 पर कॉल करने को कहकर मामला टाल दिया जाता है और कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इस मामले में मध्यस्थ की तरफ से एडवोकेट आनंद पुरचुरे, याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट आशुतोष धर्माधिकारी और एडवोकेट तुषार मंडलेकर, अदालत मित्र के तौर पर एडवोकेट अब्दुल सुभान, और केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से एडवोकेट कार्तिक शुकुल, एडवोकेट शिशिर उके और एडवोकेट नितिन राव ने पक्ष रखा।
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