बॉम्बे हाईकोर्ट: ध्वनीप्रदूषण नियम हर त्योहार पर बराबर लागू होंगे
महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर से होने वाले ध्वनीप्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, नागपुर में 1 नवंबर तक कुछ साउंड सिस्टम पर पाबंदी बरकरार।
महाराष्ट्र में त्योहारों और उत्सवों के मौके पर होने वाले ध्वनीप्रदूषण का मुद्दा इन दिनों जोरों पर चर्चा में है। पुणे के सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट ने जब इस मुद्दे को उठाया, तो राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। इसके बाद अब ध्वनीप्रदूषण और त्योहारों के दौरान नियमों को लागू करने का मामला अदालत तक भी पहुंच गया है। पुणे में ध्वनीप्रदूषण के नियमों को लागू करने को लेकर दाखल एक नई जनहित याचिका पर 5 अक्टूबर को सुनवाई होनी है।
कोर्ट की कार्यवाही में ध्वनीप्रदूषण के नियमों को असरदार तरीके से लागू करने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने का सवाल उठाया गया है। कोर्ट पहले भी ध्वनीप्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन कराने पर जोर देता रहा है। बॉम्बे हाईकोर्ट के 2025 के एक फैसले में भी साफ किया गया था कि ध्वनीप्रदूषण के नियम टूटने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
कोर्ट की भूमिका से यह भी साफ हो गया कि ध्वनीप्रदूषण का मुद्दा उठाते वक्त किसी त्योहार या धर्म के उत्सव का विरोध करना मकसद नहीं है, बल्कि आवाज की तय सीमा और नियमों का पालन ही असली मुद्दा है। बॉम्बे हाईकोर्ट के पहले के एक आदेश में यह भी दर्ज है कि लाउडस्पीकर या सार्वजनिक तौर पर आवाज बढ़ाने वाले सिस्टम इस्तेमाल करने का अलग से हक किसी एक धर्म को नहीं है। यानी साल भर होने वाले तमाम धार्मिक और सार्वजनिक जुलूसों में यह देखा जाएगा कि ध्वनीप्रदूषण के नियम पाले जा रहे हैं या नहीं।
नागपुर खंडपीठ के सामने चल रहे एक मामले में 11 सितंबर के आदेश में यह दर्ज है कि नागपुर पुलिस ने 3 सितंबर से 1 नवंबर तक कुछ खास तरह के डीजे, प्लाज्मा और प्रेशर-मिड साउंड सिस्टम के साथ-साथ ऐसे सिस्टम लेकर चलने वाली मॉडिफाइड गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ आदेश जारी कर देना काफी नहीं, इसे ठीक से लागू भी किया जाए। नियम टूटने पर संबंधित लोगों पर कार्रवाई करने की बात भी कोर्ट ने साफ कर दी।
इसी बीच अहिल्यानगर में डीजे कारोबारियों की तरफ से पाबंदियों पर सवाल उठाए जाने पर पुलिस प्रशासन ने नियमों का पालन करने की अपील की है। मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन ने कहा है कि आवाज की तय सीमा टूटने पर नियम के हिसाब से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शेवगांव में गौतमी पाटील के कार्यक्रम में लगे साउंड सिस्टम को लेकर भी सवाल खड़े हुए थे। पुलिस का कहना है कि अगर उस कार्यक्रम में तय ध्वनी सीमा टूटी होगी, तो नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
पुणे के विद्यानंद बापट ने गणेशोत्सव के दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और बाकी साउंड सिस्टम से होने वाले ध्वनीप्रदूषण के खिलाफ मुहिम चलाई थी। उनकी इस मुहिम को कुछ नागरिकों और संगठनों का साथ मिला, वहीं कुछ गणेश मंडलों और संगठनों ने इसका विरोध भी किया। इसी बीच पुणे में ध्वनीप्रदूषण के नियम लागू न होने का दावा करते हुए एक नई जनहित याचिका दाखल हुई है, जिस पर 5 अक्टूबर को सुनवाई तय है। ऐसे में आने वाले त्योहारों और उत्सवों के मौसम में डीजे, लाउडस्पीकर और आवाज की तय सीमा के नियम कैसे लागू होते हैं, इस पर अब सबकी नजर टिकी है।
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