गणेशोत्सव में डीजे-ढोल के शोर पर हाईकोर्ट में याचिका, नियम सख्ती से लागू करने की मांग
बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर 2016 के आदेश का पालन न होने का दावा किया गया है।
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को परंपरा और श्रद्धा का त्योहार माना जाता है, लेकिन बाप्पा के जुलूस के दौरान डीजे और डॉल्बी के कर्णकर्कश आवाज का मसला हर साल उठता है। इस बार भी गणेशोत्सव के दौरान डीजे, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों की आवाज से होने वाले ध्वनिप्रदूषण का मुद्दा बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों का असरदार तरीके से पालन नहीं हो रहा है। याचिका में गणेशोत्सव के साथ-साथ आने वाले दूसरे त्योहारों के दौरान भी ध्वनिप्रदूषण नियंत्रण के नियम सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।
इस याचिका में डॉ. महेश विजय बेडेकर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट के दिए फैसले का हवाला दिया गया है। उस फैसले में कोर्ट ने साफ किया था कि Noise Pollution (Regulation and Control) Rules लागू करना जरूरी है। साथ ही यह भी कहा गया था कि लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम इस्तेमाल करने के लिए संबंधित प्राधिकरण की लिखित परमिशन लेना जरूरी है।
कोर्ट के फैसले के मुताबिक आम तौर पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम या आवाज पैदा करने वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक है। हालांकि राज्य सरकार साल में ज्यादा से ज्यादा 15 नोटिफाइड त्योहारों के दिन रात 10 से 12 बजे तक सीमित छूट दे सकती है। इस छूट के दौरान भी तय ध्वनिमर्यादा का पालन करना जरूरी है।
अस्पतालों, स्कूल-कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों और कोर्ट के आसपास के इलाकों को साइलेंस जोन माना जाता है, जहां ज्यादा सख्त नियम लागू होते हैं। 2016 के फैसले में खुले साइलेंस जोन में लाउडस्पीकर के साथ-साथ ढोल या दूसरे वाद्यों के इस्तेमाल पर भी पाबंदी साफ की गई थी।
याचिका दाखिल करने वाले ने सवाल उठाया है कि नियम मौजूद होने के बावजूद इन्हें असल में लागू नहीं किया जा रहा। मांग की गई है कि रेसिडेंशियल, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और साइलेंस जोन में तय ध्वनिमर्यादा का पालन हो और शिकायत मिलने पर उल्लंघन करने वालों पर असरदार कार्रवाई हो। 2016 के फैसले के मुताबिक रेसिडेंशियल इलाकों के लिए दिन में 55 और रात में 45 dB(A) की सीमा तय है, जबकि साइलेंस जोन के लिए यह सीमा क्रमशः 50 और 40 dB(A) है।
इस बीच इस साल के गणेशोत्सव में महाराष्ट्र के ध्वनि नियमों को लागू करने से जुड़ा मसला फिर चर्चा में आ गया है, खासकर डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर।
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