डीजे नियम तोड़ने वालों पर एक्शन क्यों नहीं, हाई कोर्ट की नागपुर पुलिस को कड़ी फटकार
त्योहारों में तेज आवाज में बजे डीजे और साउंड सिस्टम को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और नागपुर पुलिस को नियम तोड़ने वालों पर सख्ती न बरतने के लिए फटकार लगाई है।
नागपुर में त्योहारों और उत्सवों के दौरान बजने वाले अवैध और कानफोड़ डीजे तथा साउंड सिस्टम के मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और शहर पुलिस को नियम तोड़ने वाले आयोजकों के खिलाफ जमीन पर ठोस कार्रवाई न करने पर जमकर फटकार लगाई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीधा सवाल उठाया कि जब आयोजकों ने ध्वनि प्रदूषण के तय मानकों का खुलेआम उल्लंघन किया, तो पुलिस ने संबंधित उत्सव मंडलों की अनुमति उसी वक्त रद्द क्यों नहीं की। मामले में राज्य सरकार और शहर पुलिस की तरफ से सरकारी वकील एसएन राव ने कोर्ट के सामने पुलिस की अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्योरा रखा।
लेकिन कोर्ट ने इस रिपोर्ट को महज कागजी खानापूर्ति बताया। सरकारी वकील ने जब यह दलील दी कि पुलिस के लिए आयोजकों की अनुमति सीधे रद्द करना मुमकिन नहीं है, तो कोर्ट ने इस पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि जो नागपुर पुलिस मंडलों को उत्सव और लाउडस्पीकर की परमिशन देती है, उसी के पास नियम टूटने पर वह परमिशन कैंसल करने का अधिकार कैसे नहीं होगा। कोर्ट ने पुलिस को अपने अधिकार क्षेत्र और पावर का पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया और मामले की सुनवाई बुधवार तक टाल दी।
अधि. मंडलेकर ने कोर्ट के सामने पोला पर्व के दौरान निकाले गए जुलूसों के वीडियो फुटेज और ऑडियो रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर पेश किए। इन वीडियो से साफ हुआ कि पुलिस के प्रतिबंधात्मक आदेश और चेतावनी के बावजूद सड़कों पर तेज आवाज में डीजे बजाकर नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। फुटेज और डेसिबल लेवल की जांच में यह भी साबित हुआ कि आवाज का स्तर कानून में तय सीमा से कई गुना ज्यादा था। इस पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रशासन नियम लागू कराने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
पिछली सुनवाई में जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस राज वाकोडे ने साफ निर्देश दिए थे कि ध्वनि मर्यादा तोड़ने पर सिर्फ डीजे चलाने वालों पर ही नहीं, बल्कि कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों पर भी सीधे एफआईआर दर्ज की जाए। इस बार जब सरकारी पक्ष ने पोला, मारवत और दही-हांडी उत्सवों के दौरान की गई कार्रवाई का ब्योरा दिया, तो याचिकाकर्ता के वकील अधि. तुषार मंडलेकर ने इसका जोरदार विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस की यह कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है और असल में किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अब तक एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
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