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21:56 IST

वाई के पाथवे में 300 रुपये का पत्थर 750 में? विजय ढेकाणे ने मांगी जांच

वाई नगरपरिषद के ब्राह्मणशाही घाट के पाथवे के काम में पत्थर के दाम और गुणवत्ता पर विरोधी पक्षनेता ने सवाल उठाए हैं।

वाई के पाथवे में 300 रुपये का पत्थर 750 में? विजय ढेकाणे ने मांगी जांच तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

वाई नगरपरिषद के ब्राह्मणशाही घाट और उसके आसपास करीब तीन करोड़ रुपये का पाथवे बना है। इस काम में लगे पत्थर के दाम और बनावट की गुणवत्ता को लेकर विरोधी पक्षनेता विजय ढेकाणे ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मांग की है कि अंदाजपत्रक के दाम, असल में इस्तेमाल हुए सामान और खर्च की निष्पक्ष और गहरी जांच हो। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि जनता के पैसों की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ढेकाणे का आरोप है कि पाथवे में लगे पत्थर का बाजार भाव करीब 250 से 300 रुपये है, लेकिन संबंधित कन्सल्टंट ने अंदाजपत्रक में उसका दाम 750 रुपये दिखाया है। उन्होंने पूछा है कि बाजार भाव और अंदाजपत्रक के दाम में इतना फर्क कैसे आया और दाम तय करते वक्त किस चीज को आधार बनाया गया।

ढेकाणे के मुताबिक इस काम का पत्थर कोल्हापुर से लाया गया है और उसकी कीमत इससे भी कम है। इसलिए उन्होंने मांग की है कि असल में इस्तेमाल हुए पत्थर का प्रकार, गुणवत्ता, मोटाई और बाजार मूल्य जांचा जाए और फिर अंदाजपत्रक के दाम से उसकी तुलना की जाए।

काम की गुणवत्ता पर भी ढेकाणे ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि काम के लिए आरएमसी यानी रेडी मिक्स कॉन्क्रीट इस्तेमाल करने के निर्देश थे, मगर असल में साधारण मिश्रण लगाया गया। उन्होंने कहा कि मंजूर तकनीकी मानकों के हिसाब से काम हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र विशेषज्ञों से मौके पर जाकर जांच जरूरी है।

उनका कहना है कि यह काम नगरपरिषद के प्रशासकीय काल में हुआ है। इसलिए प्रशासकीय मंजूरी, कन्सल्टंट की नियुक्ति, अंदाजपत्रक, निविदा प्रक्रिया, मंजूर दर, इस्तेमाल किया गया सामान और चुकाए गए बिलों की जांच होनी चाहिए। ढेकाणे ने जोर दिया कि जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि असल काम का दर्जा भी परखा जाए।

ढेकाणे ने कहा, "वाई की जनता के पैसों से यह काम हुआ है। इसलिए हर रुपये का हिसाब जनता को मिलना चाहिए। अंदाजपत्रक के दाम और बाजार भाव के फर्क की जांच होनी चाहिए। काम का दर्जा भी जांचा जाना चाहिए। जनता ने हमें बड़े अंतर से चुनकर दिया है, उनका भरोसा बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। अगर जनता के पैसों की उधमबाजी हो रही है, तो उसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। जरूरत पड़ी तो जनता के हित में सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।"

इसके साथ ही ढेकाणे ने मांग की है कि इस काम की प्रशासकीय मंजूरी से लेकर आखिरी बिल तक के सारे कागजात सार्वजनिक किए जाएं। दाम और गुणवत्ता को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब स्वतंत्र जांच से सामने आना चाहिए।

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