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साय डोंगर में पेड़ कटाई पर निंबाळकर ने भी जताया ऐतराज, सरकार से तुरंत रोकने की मांग

कर्जत के साय डोंगर में ऊर्जा परियोजना के लिए पेड़ कटाई पर शिंदे गुट के सांसद ओमराजे निंबालकर ने भी विरोध जताया है।

साय डोंगर में पेड़ कटाई पर निंबाळकर ने भी जताया ऐतराज, सरकार से तुरंत रोकने की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

रायगड जिले के कर्जत तहसील में साय डोंगर इलाके की पेड़ कटाई का मामला अब गरमा गया है। प्रस्तावित ऊर्जा परियोजना के लिए जंगल के पेड़ काटे जा रहे हैं। इस पर पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है।

शिवसेना ठाकरे गुट के विधायक आदित्य ठाकरे की अगुवाई में शिवसैनिकों ने इलाके में जाकर विरोध दर्ज कराया। अब शिंदे गुट के सांसद ओमराजे निंबालकर ने भी पेड़ कटाई का विरोध किया है, जिससे यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

निंबालकर ने भीमाशंकर इलाके की पेड़ कटाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और मांग की कि इसे तुरंत रोका जाए। उनका कहना था कि एक पेड़ को बड़ा होने में कई दशक लगते हैं, और कुछ प्रजातियों को तो सैकड़ों साल लग जाते हैं। इसलिए जंगल का नुकसान हो जाए तो उसकी भरपाई आसानी से नहीं हो सकती।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर किसी परियोजना के लिए पेड़ काटना मजबूरी ही हो, तो एक पेड़ के बदले 100 पेड़ लगाए जाएं और उन्हें जिंदा रखने की जिम्मेदारी भी तय की जाए। निंबालकर ने कहा कि कुदरत के बदलते हालात की मार किसानों पर पड़ रही है, ऐसे में सरकार को पर्यावरण बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

इस बीच शिवसेना ठाकरे गुट के नेता अनिल परब ने इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा। परब का आरोप है कि सरकार कुछ उद्योग समूहों के फायदे के लिए जंगल का नुकसान कर रही है। ये आरोप परब के हैं और इन पर अलग से पुष्टि जरूरी है।

इस परियोजना के लिए 32 हजार से ज्यादा पेड़ काटे जाने की बात कही जा रही है। परब का दावा है कि असल नुकसान इससे कहीं बड़ा होगा। हालांकि पेड़ कटाई का सही दायरा आधिकारिक आंकड़ों से साफ होना जरूरी है।

परब ने कहा कि पेड़, बारिश और पर्यावरण का आपस में गहरा रिश्ता है, इसलिए जंगल कटाई का मुद्दा सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है। पर्यावरण प्रेमियों को चिंता है कि जंगल को नुकसान पहुंचा तो जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण पर असर पड़ेगा।

अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार इस परियोजना पर क्या रुख अपनाती है, पेड़ कटाई की कितनी इजाजत दी गई है और दोबारा पौधे लगाने का क्या इंतजाम है। विकास के साथ पर्यावरण की हिफाजत कैसे होगी, यह सवाल एक बार फिर सामने आ गया है।

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