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साय डोंगर की पेड़ कटाई पर आदित्य ठाकरे का फडणवीस पर वार, बोले लड़ाई नहीं रुकेगी

कर्जत-भीमाशंकर इलाके के साय डोंगर में पेड़ों की कटाई को लेकर आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा और आंदोलन जारी रखने की बात कही।

साय डोंगर की पेड़ कटाई पर आदित्य ठाकरे का फडणवीस पर वार, बोले लड़ाई नहीं रुकेगी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र में विकास के नाम पर जंगलों पर कुल्हाड़ी चलाने का आरोप लगाते हुए पर्यावरण प्रेमियों ने अब सख्त रुख अपना लिया है। कर्जत-भीमाशंकर इलाके के साय डोंगर पर पेड़ों की कटाई के मुद्दे से सियासी माहौल भी गरम हो गया है। शिवसेना ठाकरे गुट के विधायक आदित्य ठाकरे ने उस इलाके का दौरा किया, जहां पेड़ काटे जा रहे हैं, और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर जोरदार हमला बोला।

स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का दावा है कि प्रस्तावित जलविद्युत ऊर्जा स्टोरेज प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाएंगे। इसी बात पर आदित्य ठाकरे ने सरकार के फैसले लेने के तरीके पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, "आप मेगावाट कहते हो, लेकिन यहां मेगा वाट लगा रहे हो।" उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस प्रोजेक्ट को लेकर सार्वजनिक सुनवाई हुई थी, स्थानीय लोगों ने जो आपत्तियां दर्ज कीं उनका क्या हुआ, और क्या दूसरी जगहों पर विचार किया गया था।

साय डोंगर का जंगल बचाने के लिए आंदोलन जारी रहेगा, यह इरादा आदित्य ठाकरे ने जताया। उन्होंने कहा, "मरना भी पड़े तो चलेगा, लेकिन यह लड़ाई रुकनी नहीं चाहिए", यानी चाहे जान चली जाए, यह लड़ाई रुकनी नहीं चाहिए। इसी के साथ उन्होंने स्थानीय लोगों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। पेड़ बचाने के लिए चिपको आंदोलन जैसा रास्ता अपनाने की अपील भी उन्होंने की। उनका कहना था कि विकास के नाम पर पर्यावरण का नुकसान नहीं होना चाहिए।

आदित्य ठाकरे के इस दौरे में सांसद संजय राऊत, सुषमा अंधारे और अंबादास दानवे समेत शिवसेना ठाकरे गुट के कई नेता मौजूद थे।

टोरंट पावर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी की बात सामने आ रही है। आंदोलनकारियों को डर है कि पेड़ कटने से जंगल, जैव विविधता और आसपास के पर्यावरण पर असर पड़ेगा।

अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार और संबंधित कंपनी इस प्रोजेक्ट पर क्या रुख रखती हैं और स्थानीय लोगों की आपत्तियों पर क्या फैसला होता है। इस बहाने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ गई है।

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