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यूरोप में चीनी कार कंपनियां जापानी कंपनियों से आगे निकलीं, पूरी तिमाही में पहली बार

सितंबर 2026 में यूरोप की नई कार रजिस्ट्रेशन में चीनी ब्रांड्स का हिस्सा 12.7% रहा, जबकि जापानी कंपनियों का 11.9%।

यूरोप में चीनी कार कंपनियां जापानी कंपनियों से आगे निकलीं, पूरी तिमाही में पहली बार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

यूरोप के कार बाजार में पहली बार चीनी कंपनियों ने जापानी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। चीनी कार ब्रांड्स ने पूरी तिमाही की बिक्री के हिस्से में जापानी प्रतिस्पर्धियों को मात दी है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इन दिनों बड़े बदलाव दिख रहे हैं, और इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती मांग की वजह से चीनी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तेजी से फैल रही हैं। इस खबर के बाद दुनिया भर के कार मार्केट में मुकाबला और तेज होने की संभावना है।

आंकड़ों की बात करें तो मार्केट रिसर्च कंपनी डेटाफोर्स के मुताबिक सितंबर 2026 में यूरोप की कुल नई कार रजिस्ट्रेशन में चीनी ब्रांड्स का हिस्सा 12.7% रहा। जापानी कंपनियों का हिस्सा 11.9% था। पिछले साल के मुकाबले चीनी ब्रांड्स की रजिस्ट्रेशन में करीब दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

चीन की कार कंपनियां पिछले कुछ सालों से यूरोप में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगी थीं। BYD, MG, Omoda, Jaecoo और दूसरे चीनी ब्रांड्स यूरोप के कस्टमर्स को लुभाने के लिए अलग-अलग मॉडल उतार रहे हैं। इलेक्ट्रिक कार, प्लग-इन हाइब्रिड और पेट्रोल कारों के जरिए ये कंपनियां अलग-अलग तरह के ग्राहकों को निशाना बना रही हैं।

इस बढ़त के पीछे मुकाबले की कीमत, नई टेक्नोलॉजी, अच्छा डिजाइन और फीचर्स पर जोर जैसी वजहें बताई गई हैं। खास तौर पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों में चीन ने बड़ी प्रोडक्शन क्षमता खड़ी कर ली है। इसी वजह से कई चीनी कंपनियां कम वक्त में नए मॉडल बनाकर इंटरनेशनल मार्केट में उतार पा रही हैं।

दूसरी तरफ टोयोटा, निसान, होंडा और सुजुकी जैसी जापानी कंपनियां कई दशकों से यूरोप में अपनी जगह बनाए हुए हैं। भरोसा, अच्छी ईंधन क्षमता और बिक्री के बाद की सर्विस को उनकी ताकत माना जाता है। लेकिन अब चीनी ब्रांड्स से मिल रही टक्कर की वजह से उन्हें अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ रहा है। इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड गाड़ियों के सेगमेंट में चीनी कंपनियां आक्रामक तरीके से बढ़ रही हैं। यूरोप के कस्टमर्स को ज्यादा फीचर्स और मुकाबले की कीमत में कार मिल रही है, इसलिए उनका ध्यान इन ब्रांड्स की ओर बढ़ रहा है।

हाइब्रिड कारों की बढ़ती मांग भी चीनी कंपनियों की कामयाबी की एक बड़ी वजह है। इसके अलावा चीन में अपने देश के भीतर की होड़ और सुस्त पड़ी मांग के चलते BYD और चेरी जैसी कंपनियां विदेशी मार्केट पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। यूरोप में लोकल प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी भी चल रही है। चेरी बार्सिलोना में प्रोडक्शन शुरू करने की तैयारी में है, जबकि BYD हंगरी में अपने प्रोडक्शन प्लांट का काम पूरा करने के करीब है।

चीनी कंपनियों की बढ़ती लोकप्रियता सिर्फ जापानी कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि फोक्सवैगन, रेनो और BMW जैसी यूरोपीय कंपनियों के लिए भी चुनौती बन रही है। इसी वजह से यूरोपियन यूनियन चीनी गाड़ियों के आयात पर शुल्क और लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने वाले नियमों पर विचार कर रही है। आगे यूरोप के कार मार्केट में कीमत, टेक्नोलॉजी और लोकल प्रोडक्शन को लेकर मुकाबला और बढ़ सकता है।

कुल मिलाकर चीनी कंपनियों का जापानी प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलना ऑटोमोबाइल सेक्टर का बड़ा बदलाव है। फिर भी यूरोपीय ब्रांड्स का दबदबा अभी बना हुआ है, इसलिए यह मुकाबला आगे क्या मोड़ लेता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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