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नागपुर: फर्जी वकील बनकर तेल मिल मालिक से 3 करोड़ ऐंठने की साजिश, आदित्य गुप्ता गिरफ्तार

नागपुर पुलिस ने सेक्सटॉर्शन की साजिश के आरोप में आगरा के आदित्य सुरेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने खुद को वकील बताकर राजस्थान के एक तेल मिल मालिक से 3 करोड़ रुपये ऐंठने की योजना बनाई।

नागपुर: फर्जी वकील बनकर तेल मिल मालिक से 3 करोड़ ऐंठने की साजिश, आदित्य गुप्ता गिरफ्तार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में सेक्सटॉर्शन की कथित साजिश की जांच में एक ऐसे शख्स का नाम सामने आया है, जो 12वीं में फेल हो चुका है, लेकिन खुद को वकील बताता था। आरोपी का नाम आदित्य सुरेश गुप्ता है। आरोप है कि उसने राजस्थान के एक तेल मिल मालिक से 3 करोड़ रुपये वसूलने की योजना बनाई और इसके लिए एक महिला को शिकायतकर्ता बनाकर कारोबारी को यौन शोषण के मामले में फंसाया।

गुप्ता उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला है। पुलिस का शक है कि वह उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक पहुंच का दिखावा करता था और खुद को यौन उत्पीड़न झेलने वाली महिलाओं का मददगार बताता था। जांच करने वालों के मुताबिक सोशल मीडिया पर उसने अपनी ऐसी छवि बड़ी सोच-समझकर गढ़ी थी।

आरोप है कि इसी छवि की वजह से मदद मांगने आने वाली महिलाएं उस पर भरोसा कर लेती थीं। पुलिस को शक है कि बाद में उसने उन महिलाओं की जानकारी, संपर्कों और निजी हालात का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर ब्लैकमेल के धंधे में किया। जांच करने वालों का कहना है कि वह लोगों को एक ऐप की तरफ भेजता था और उससे मिले संपर्कों और जानकारी का इस्तेमाल करता था। उसके मोबाइल फोन से इस रैकेट से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री भी मिली बताई जा रही है, जो आगे जांच में अहम सबूत बन सकती है।

पूछताछ में गुप्ता ने कथित तौर पर माना कि वह वकील नहीं है और 12वीं की परीक्षा में फेल हुआ था। उसके दावे और उसकी असली पढ़ाई के बीच इस फर्क को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है, ताकि पता चले कि उसने लोगों का भरोसा कैसे जीता।

राजस्थान के तेल मिल मालिक वाला मामला उस पर लगे सबसे गंभीर आरोपों में से एक है। जांच के मुताबिक गुप्ता ने चंद्रपुर की एक महिला के रहने का इंतजाम नागपुर के मोमिनपुरा इलाके में किया और उसके जरिए कारोबारी को सेक्सटॉर्शन के केस में फंसाया। महिला की शिकायत पर पुलिस ने कारोबारी को गिरफ्तार किया और उसे पुलिस कस्टडी में भेजा गया।

लेकिन आगे की जांच में कारोबारी पर लगे आरोपों को लेकर शक पैदा हुआ। पुलिस का शक है कि गुप्ता महिला का हमदर्द बनकर पूरा खेल खुद चला रहा था और उसका मकसद कारोबारी से 3 करोड़ रुपये निकलवाना था। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि शिकायत कैसे तैयार हुई, महिला और कारोबारी को मिलवाने में गुप्ता की क्या भूमिका थी, और क्या किसी बातचीत या पैसों के लेनदेन से वसूली की इस थ्योरी की पुष्टि होती है।

इस मामले में एक मोड़ तब आया, जब गुप्ता ने कथित तौर पर नागपुर पुलिस को जांच प्रभावित करने के लिए 30 लाख रुपये की पेशकश की। आरोप है कि इससे उसे फायदा होने के बजाय उसकी अपनी हरकतों पर नजर और कड़ी हो गई, और आखिर में उसकी गिरफ्तारी हुई। उसे अब नागपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह पेशकश किन हालात में की गई और क्या इसका सीधा संबंध तेल मिल मालिक वाले केस से था।

गुप्ता के अपने परिवार को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। बताया गया है कि कुछ महीने पहले पुणे में एक महिला डॉक्टर की खुदकुशी के बाद उसके बुजुर्ग माता-पिता और भाई कानूनी परेशानी में थे। आरोप है कि इसी दौरान गुप्ता ने घर में परिवार की गैरमौजूदगी का फायदा उठाया और एक साथी की मदद से अपने ही घर से नकदी और कीमती गहने चुरा लिए। जांच करने वालों को शक है कि उसने इस माल से ऐशो-आराम की जिंदगी का खर्च चलाया। पुलिस यह भी देख रही है कि सामान किन हालात में गायब हुआ और इसमें उस साथी की क्या भूमिका थी।

अब पुलिस गुप्ता के मोबाइल से मिली सामग्री खंगाल रही है, ताकि संभावित पीड़ितों की पहचान हो सके और अलग-अलग लोगों के बीच कड़ियां जुड़ सकें। उसके इस्तेमाल किए ऐप, सोशल मीडिया गतिविधि और बातचीत की भी जांच होगी, ताकि पता चले कि मदद मांगने वाली महिलाओं को बाद में ब्लैकमेल में फंसाया गया या नहीं। राजस्थान के कारोबारी वाली साजिश को शुरू से जोड़ना और यह पता लगाना कि इसमें और कौन शामिल था, पुलिस के लिए बड़ा काम है। चंद्रपुर की महिला और घर की चोरी में कथित साथी की भूमिका की भी आगे जांच होनी है।

गिरफ्तारी से कई कथित आपराधिक कड़ियां खुली हैं, लेकिन रैकेट कितना बड़ा था और हर आरोप के पीछे क्या सबूत हैं, यह जांच और अदालती कार्यवाही में तय होगा।

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