कर्जत के सायडोंगर जंगल में टोरंट प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई, 32 हजार से ज्यादा पेड़ों की इजाज़त
कर्जत तालुका के सायडोंगर में टोरंट पॉवर के जलविद्युत प्रोजेक्ट के लिए 640 एकड़ वनजमीन पर पेड़ कटने लगे हैं।
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कर्जत तालुका के पाली तर्फे कोतवाल खलाटी के सायडोंगर इलाके में टोरंट पॉवर के जलविद्युत प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं। इससे पर्यावरण का सवाल गरमा गया है। जानकारी सामने आई है कि वन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए 640 एकड़ वन भूमि के पूरे 32 हजार 480 पेड़ काटने की इजाज़त दी है।
सायडोंगर का आरक्षित वन सर्वे नंबर 28 और 29 की 640 एकड़ जमीन टोरंट प्रोजेक्ट को दी गई है। बताया जा रहा है कि कर्जत वन विभाग ने इन पेड़ों को काटने की परमिशन 7 अक्टूबर 2026 को दी थी। दशहरे के मुहूर्त पर पेड़ों की कटाई शुरू हो गई।
पालघर जिले के वाडा और मोखाडा तालुका से आए मजदूर रोज़ करीब 500 पेड़ काट रहे थे, ऐसी जानकारी है। यह कटाई पूरी होने में लगभग पाँच महीने लग सकते हैं।
खास बात यह है कि इस इलाके को संवेदनशील और संरक्षित वनक्षेत्र बताने वाले बोर्ड खुद वन विभाग ने लगाए हैं। सायडोंगर में अंदर जाने की मनाही के बोर्ड भी विभाग के ही हैं। एक तरफ यह इलाका संवेदनशील और आरक्षित जंगल बताया जाता है और दूसरी तरफ उसी जगह पेड़ काटने की इजाज़त दी गई है। इसी वजह से वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, और स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी नाराज़ हैं।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के नेता आदित्य ठाकरे ने इस पर सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने पूछा कि स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के विरोध को दरकिनार करके हज़ारों पेड़ों की कटाई किसके आशीर्वाद से चल रही है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि नवंबर में होने वाले भूमिपूजन की जल्दी में महाराष्ट्र के पर्यावरण की बलि क्यों दी जा रही है।
इसी बीच कर्जत पर्यावरण बचाव समिति ने पेड़ों से लिपटकर चिपको आंदोलन करने का फैसला किया है। समिति ने ऐलान किया है कि अभिनेता सयाजी शिंदे इस आंदोलन में शामिल होंगे।
सायडोंगर में पेड़ कटाई का स्थानीय स्तर पर काफी विरोध हो रहा है। पर्यावरण बचाव समिति और नागरिक इस कार्रवाई के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं।
बढ़ते विरोध को देखते हुए ठेकेदार कंपनी ने वाडा और मोखाडा से आए पेड़ काटने वाले मजदूरों को वहाँ से भेज देने की जानकारी है। बताया जा रहा है कि कल से सायडोंगर जंगल में पेड़ काटने वाले मजदूर नज़र नहीं आ रहे। फिर भी हज़ारों पेड़ों पर खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए आगे यह टकराव और तेज़ होने की संभावना है।
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