नागपुर में SIR के 3.94 लाख वोटर नोटिस अब तक नहीं पहुंचे, आधे से कुछ कम बाकी
नागपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जारी किए गए करीब आधे नोटिस अब तक वोटरों के हाथ में नहीं पहुंचे हैं। इससे यह चिंता उठ रही है कि प्रभावित वोटरों को सत्यापन की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पूरा वक्त मिलेगा या नहीं।
ताज़ा नोटिस एंड हियरिंग रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल 8.66 लाख नोटिस तैयार किए गए। इनमें से सिर्फ 4.71 लाख नोटिस डिलीवर हुए हैं, यानी कुल का 54.45 प्रतिशत। बाकी 3.94 लाख नोटिस, यानी 45.55 प्रतिशत, अब भी पेंडिंग हैं।
चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां निपटाने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 10 नवंबर कर दी है।
विधानसभा क्षेत्रों के हिसाब से नोटिस डिलीवरी की तस्वीर काफी अलग-अलग है। सबसे ज़्यादा नोटिस नागपुर उत्तर में पेंडिंग हैं, जहां 66,623 नोटिस नहीं पहुंचे। नागपुर पश्चिम में 59,760 और हिंगना में 57,044 नोटिस बाकी हैं। इन तीनों क्षेत्रों को मिलाकर 1,83,427 नोटिस डिलीवर होने बाकी हैं।
नागपुर दक्षिण पश्चिम में हालत बेहतर है। वहां तैयार हुए 89,352 नोटिसों में से 74,511 डिलीवर हो चुके हैं। वहीं नागपुर दक्षिण में 76,464 नोटिसों में से सिर्फ 28,372 ही डिलीवर हुए हैं।
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 47,209 सुनवाइयां हो चुकी हैं। 2,92,914 मामलों में सुनवाई की तारीख निकल चुकी है, जबकि 4,943 और मामलों में दोबारा तय की गई सुनवाई की तारीख भी बीत चुकी है।
जिला निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर 65,054 मामले पेंडिंग हैं। इनमें से 61,465 मामले पांच दिन से ज़्यादा वक्त से अटके हुए हैं।
ये नोटिस उन वोटरों के लिए हैं जिनके रिकॉर्ड SIR के दौरान अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले पाए गए। ऐसे वोटरों को दस्तावेज़ जमा करने पड़ सकते हैं, सुनवाई में हाज़िर होना पड़ सकता है और गड़बड़ियां दूर करानी पड़ सकती हैं, ताकि उनका चुनावी रिकॉर्ड ठीक से सत्यापित हो सके।
संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक आवेदन और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 26 अक्टूबर है। दावे और आपत्तियां निपटाने और नोटिस से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने की आखिरी तारीख 10 नवंबर है। अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित होनी है।
करीब चार लाख नोटिस अभी डिलीवर होने बाकी हैं, इसलिए आने वाले हफ्ते चुनाव अधिकारियों और प्रभावित वोटरों दोनों के लिए अहम होंगे। अंतिम सूची आने से पहले नोटिस वक्त पर पहुंचना और सुनवाइयां पूरी होना ज़रूरी होगा, ताकि पात्र वोटरों को गड़बड़ियां ठीक कराने का मौका मिल सके।
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