चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण का आदेश दिया
चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसएसआर के आदेश जारी किए।
नई दिल्ली: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देशभर में चल रहे व्यापक विरोध और कानूनी विवाद के बीच भारतीय चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के आदेश जारी किए हैं।
इस पुनरीक्षण का मकसद सूची में नए मतदाताओं को जोड़ना और मतदाताओं से जुड़ी गलतियां सुधारकर सूची को अपडेट करना है।
यह मुहिम उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, केरल, छत्तीसगढ़, असम, गोवा, मणिपुर, पुदुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में चलाई जाएगी। जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर अभी चल रहा है या हाल ही में पूरा हुआ है, वहां एसएसआर का कार्यक्रम बाद में अलग से घोषित किया जाएगा। आयोग के इस फैसले को आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
चुनावों की बात करें तो 403 सदस्यों वाली उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में खत्म हो रहा है। पंजाब (117 सीटें), उत्तराखंड (70 सीटें), गोवा (40 सीटें) और मणिपुर (60 सीटें) की विधानसभाओं का कार्यकाल भी मार्च 2027 में पूरा हो रहा है।
प्रारूप मतदाता सूची से जिनके नाम हटाए गए हैं, उन्हें सबूत देकर दोबारा नाम जुड़वाने का मौका है। इसके बावजूद ज्यादातर मतदाताओं में इसे लेकर उदासीनता दिख रही है। जिले में एसआईआर का दूसरा चरण अभी चल रहा है और इस चरण में प्रशासन के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। नाम हटे लोगों को नोटिस भेजे गए और खास शिविर भी लगाए गए, फिर भी मतदाता जवाब नहीं दे रहे। ऐसे में बीएलओ के सामने सवाल है कि काम पूरा कैसे किया जाए।
जिन राज्यों में एसआईआर चल रहा है या हाल में खत्म हुआ है, उन्हें एसएसआर से बाहर रखा गया है, जैसे आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और दिल्ली। जिसका नाम एसआईआर में हट गया हो, वह ड्राफ्ट सूची में नाम देखे। नाम न हो तो फॉर्म 6 भरकर दोबारा पंजीकरण कराए। सबूत के तौर पर आधार और जन्म प्रमाणपत्र चाहिए। ईसीआई ने संकेत दिए हैं कि माता-पिता का पुराना प्रमाणपत्र अब एसएसआर में नहीं मांगा जाएगा।
बिहार में एसआईआर जून से सितंबर 2025 के बीच हुआ। पहले वहां 7.9 करोड़ मतदाता थे, एसआईआर के बाद 7.41 करोड़ रह गए, यानी 48 लाख नाम कम हुए और इस पर विवाद जारी है। अब अक्टूबर 2026 में फिर से 7.55 करोड़ मतदाता हैं, यानी 14 लाख नाम दोबारा बढ़े हैं।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।