नागपुर में इस बार पटाखा दुकानों के 831 परमिट, हाईकोर्ट के आदेश की परीक्षा
दिवाली से पहले अग्निशमन विभाग ने पिछले साल से ज्यादा अस्थायी प्रमाणपत्र जारी किए हैं।
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दिवाली में पटाखों के शोर पर लगाम लगाने के लिए उच्च न्यायालय ने साफ निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद नागपुर में इस बार पटाखे बेचने के लिए अग्निशमन विभाग ने बड़ी तादाद में अस्थायी परमिट जारी किए हैं। पिछले साल के मुकाबले इनकी संख्या बढ़ी है और कुल 831 प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। ऐसे में अदालत के आदेश को जमीन पर उतारना प्रशासन के लिए कसौटी होगी।
अग्निशमन विभाग के 2015 से 2026 तक के आंकड़ों को देखें तो पटाखा दुकानों के प्रमाणपत्रों की संख्या साल दर साल ऊपर-नीचे होती रही है। सबसे ज्यादा 982 प्रमाणपत्र 2016 में दिए गए थे। उसके बाद संख्या लगातार घटती गई और 2020 में 582 के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। फिर से बढ़त शुरू हुई और पिछले तीन साल से यह आंकड़ा 800 के पार ही बना हुआ है।
रात के वक्त की आतिशबाजी पर नजर रहेगी। उच्च न्यायालय ने रात 10 बजे के बाद पटाखे फोड़ने पर रोक लगाई है। इसलिए दिवाली के दिनों में इस समय-सीमा का सख्ती से पालन करवाना प्रशासन के सामने चुनौती होगी। रात 12 बजे के बाद पटाखे फोड़ने की शिकायतें अग्निशमन विभाग के पास आती रहती हैं। उन पर कार्रवाई का दबाव भी रहेगा।
अब केंद्रवार आंकड़े देखें। गंजिपेठ अग्निशमन केंद्र से 2015 में 77 और 2016 में 74 प्रमाणपत्र दिए गए थे। 2020 में यह संख्या 35 पर आ गई। इस बार इस केंद्र से 54 प्रमाणपत्र जारी हुए हैं।
सक्करदरा केंद्र से 2015 में 180 प्रमाणपत्र दिए गए थे। 2023 में 170 और 2024 में 174 जारी हुए। 2025 में यह संख्या गिरकर 98 रह गई, लेकिन इस बार फिर बढ़कर 123 हो गई है।
सुगतनगर केंद्र से 2015 में 141 और 2016 में 150 प्रमाणपत्र दिए गए थे। 2020 में आंकड़ा 93 हुआ। इस बार 110 प्रमाणपत्र जारी हुए हैं। नरेंद्रनगर केंद्र से 2018 में सबसे ज्यादा 185 प्रमाणपत्र दिए गए थे। 2020 में यह 69 पर आया, फिर 2025 में 107 और इस बार 128 प्रमाणपत्र दिए गए हैं।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी लकडगंज केंद्र में दिखती है। यहां से 2015 में 81 प्रमाणपत्र दिए गए थे। 2024 में आंकड़ा 136 रहा, 2025 में 154 और इस बार 157 पर पहुंच गया है।
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