शनिवार, 7 नवंबर 2026

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गोकुल पर चार संचालक: फडणवीस बोले, शिंदे और सुनेत्रा पवार की सहमति से हुआ फैसला

गोकुल पर चार संचालक: फडणवीस बोले, शिंदे और सुनेत्रा पवार की सहमति से हुआ फैसला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 राजनीति डेस्क

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि गोकुल में राज्य सरकार के चार संचालक नियुक्त करने का फैसला एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की सहमति से हुआ। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद संस्था पर कब्जा करना नहीं है।

राज्य सरकार ने गोकुल पर चार संचालक नियुक्त करने का फैसला किया है। इस पर शिंदे गुट ने सरकार की आलोचना की थी। शिंदे गुट का कहना था कि गोकुल में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जनता के फैसले को माना जाना चाहिए। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार इस पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह फैसला एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की सहमति से ही लिया गया था।

फडणवीस ने बताया कि यह फैसला मंत्रिमंडल ने लिया है। उनके मुताबिक फैसले से पहले चारों पार्टियों के नेता मंत्रिमंडल के सामने आए थे, जिनमें जनसुराज्य के नेता भी थे। सभी ने कानूनी अड़चन की बात रखी। इसी वजह से सरकार ने महाधिवक्ता की राय ली और महाधिवक्ता का प्रस्ताव आया। फडणवीस ने कहा कि इस पर सुनेत्रा पवार, एकनाथ शिंदे और उनकी चर्चा हुई और तीनों के दस्तखत से प्रस्ताव तैयार हुआ। उनके शब्दों में यह फैसला सरकार के तौर पर लिया गया है और किसी पार्टी की नाराजगी नहीं है। कानूनी अड़चन न होती तो यह नौबत ही नहीं आती, ऐसा भी उन्होंने कहा।

फडणवीस ने समझाया कि गोकुल के चुनाव में दो गुट हैं और किसी के पास कोरम जितने वोट नहीं हैं। कोरम पूरा न हो तो अध्यक्ष नहीं चुना जा सकता। कोई एक गुट बहिष्कार करे या बैठक में न आए, तब भी अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सकता। उनके मुताबिक चुनाव तय हुआ तो एक गुट मौजूद नहीं था, इसलिए चुनाव नहीं हुआ। मामला कोर्ट में गया तो कोर्ट ने 10 तारीख को चुनाव कराने को कहा। लेकिन अगर उस दिन भी कोरम नहीं बना तो कोरम के बिना चुनाव कराने की बात कोर्ट ने नहीं कही है। इसलिए मुख्यमंत्री के अनुसार अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाएगा।

उन्होंने कहा कि गोकुल के कानून और बायलॉज के हिसाब से तीन बार चुनाव न हो तो सारे अधिकार डीडीआर को मिल जाते हैं और चुने हुए लोगों के पास अधिकार नहीं रहते। इसी वजह से कोरम पूरा करने के लिए वोट के अधिकार के साथ कुछ लोगों को नामित करने का कानून बनाया गया है। फडणवीस के मुताबिक राज्य सरकार ने कोरम के लिए ही यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार गोकुल पर कब्जा करना चाहती है, यह भावना गलत है।

फडणवीस ने बताया कि गोकुल के करीब पाँच हजार मतदाता हैं और यह संस्था एक जिले तक सीमित है या कुछ तहसीलों में असर रखती है। उनके मुताबिक इतनी सी संस्था के लिए सरकार बेचैन है, ऐसा मानने की कोई वजह नहीं। दोनों गुट साथ बैठकर फैसला कर लें तो सरकार के नियुक्त संचालकों की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने हसन मुश्रीफ, विनय कोरे और सतेज पाटील से कहा कि वे चर्चा करके आपस में फैसला करें। फडणवीस ने कहा कि सरकार को सिर्फ अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभानी है। कोरम के बिना बार-बार बैठक टलती रही तो अधिकार वैसे भी सरकार के पास आएंगे और कामकाज डीडीआर के जरिए चलाना पड़ेगा।

फडणवीस ने कहा कि सरकार संस्था को कब्जे में नहीं लेना चाहती। उनके मुताबिक यह कोई इतनी बड़ी संस्था नहीं है, पर अच्छी संस्था है। गोकुल का राज्य की राजनीति पर कोई असर नहीं होता और सरकार के लिए इसमें कोई राजनीति नहीं है। उन्होंने फिर कहा कि दोनों गुट आपस में बैठकर बात करें।

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