गोकुल में चार संचालक नियुक्त, मुश्रीफ बोले- वरना दोबारा चुनाव कराना पड़ता
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राज्य सरकार के गोकुल संघ में चार संचालक नियुक्त करने पर विपक्ष के आरोपों का मंत्री हसन मुश्रीफ ने जवाब दिया और नियमों के हवाले से फैसले की वजह बताई।
राज्य सरकार ने गोकुल संघ पर चार संचालक नियुक्त किए हैं। इस पर सतेज पाटील और विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि यह गोकुल संघ को अपने कब्जे में लेने का सरकार का दांव है। मंत्री हसन मुश्रीफ ने मीडिया से बात करते हुए इन आरोपों का जवाब दिया। उनका दावा है कि अगर ये चार संचालक नियुक्त नहीं किए जाते तो गोकुल का चुनाव दोबारा कराना पड़ता।
मुश्रीफ ने कहा कि राहुल गांधी और विपक्ष को यह मामला समझ ही नहीं आया है। उनके मुताबिक राहुल गांधी को हर जगह वोट चोरी दिखाई दे रही है, जबकि गोकुल का मामला ऐसा नहीं है। मुश्रीफ ने गोकुल के नियमों और बायलॉज का हवाला देकर विपक्ष के सारे मुद्दों का जवाब दिया।
मुश्रीफ ने बताया कि गोकुल का चुनाव हुआ और वहां के सभासदों ने अजीब फैसला दिया। कांग्रेस के 13 और महायुति के 12 सदस्य चुनकर आए। संस्था के नियम के मुताबिक चेयरमैन के चुनाव के लिए 14 का कोरम जरूरी है। कोरम पूरा हुए बिना न चेयरमैन का चुनाव हो सकता है और न मीटिंग। मुश्रीफ ने कहा कि अगर कानून उस नियम को ओवररूल करने वाला होता तो शायद बहुमत का फैसला माना जाता। लेकिन कोरम की बायलॉज वाली शर्त पूरी करना कानूनन जरूरी था।
उन्होंने बताया कि चेयरमैन के चुनाव के लिए एक मीटिंग हुई थी। उसमें विपक्ष के यानी उनके 12 सदस्य गैरहाजिर रहे और कोरम पूरा नहीं हुआ। मुश्रीफ के अनुसार अगली मीटिंग 10 तारीख को होती तब भी यही हालत बनती। उन्होंने दावा किया कि चुनाव नियमों और महाराष्ट्र सहकारी कानून के हिसाब से चेयरमैन चुनाव की बैठक दो या तीन बार टल जाए तो प्रशासक ही नियुक्त करना होता है। प्रशासक नियुक्त होने के बाद चुनाव कराने का नियम है। मुश्रीफ का कहना है कि दो-तीन बार मीटिंग होती तो नियम से गोकुल पर प्रशासक आता और फिर चुनाव होते।
मुश्रीफ ने कहा कि महाराष्ट्र सहकारी कानून की वजह से डेडलॉक बन गया था। उनके मुताबिक ऐसा बायलॉज किसी और सहकारी संस्था में नहीं है, सिर्फ गोकुल में है। उन्होंने कहा कि अगर डेडलॉक हटाना है, लोकतंत्र कायम रखना है और कारोबार 25 लोगों के हाथ में ही सौंपना है, तो यह डेडलॉक सिर्फ सरकार ही हटा सकती थी। इसी वजह से, उनके शब्दों में, सरकार ने चुने हुए लोगों के हाथ में सत्ता देने के लिए प्रशासक नियुक्त कर बायलॉज और नियमों की अड़चन दूर की।
मुश्रीफ ने कहा कि उन पर विपक्ष की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक जनता ने उन्हें यह जनादेश नहीं दिया कि वे मीटिंग में जाकर दूसरों का चेयरमैन बनवाएं, जनता ने उन्हें विपक्ष में रहने का जनादेश दिया है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे में वे उनकी बैठक में कैसे हाजिर रहते। उनका कहना था कि इसलिए डेडलॉक खत्म करने की जिम्मेदारी सरकार की थी और सरकार ने कल चार संचालक नियुक्त करने का फैसला लिया। मुश्रीफ के मुताबिक यह कार्रवाई इसलिए की गई कि डेडलॉक दूर हो, सत्ता चुने हुए लोगों के हाथ में रहे और लोकतंत्र बना रहे। आखिर में उन्होंने कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे जानकारी लिए बिना गलत आरोप लगा रहे हैं।
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