गोकुल पर शिंदे की शिवसेना का रुख, भाजपा को झटका
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गोकुल संघ पर सरकार ने चार संचालक नियुक्त किए तो शिवसेना नाराज हो गई। सतेज पाटील ने 9 तारीख को कोल्हापुर में मोर्चे की घोषणा की है।
गोकुल संघ पर राज्य सरकार ने चार संचालक नियुक्त किए हैं, जिसके बाद जोरदार आलोचना हो रही है। विपक्ष की आलोचना के बीच सतेज पाटील ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
पाटील ने कहा कि कोल्हापुर वालों ने नकार दिया, कोर्ट में राहत नहीं मिलेगी, इसके बाद मंत्रिमंडल में आदेश निकाला गया। सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कोल्हापुर में बड़े मोर्चे की घोषणा की। यह मोर्चा 9 तारीख को निकाला जाएगा।
पाटील और विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि गोकुल संघ को कब्जे में लेना सरकार की चाल है। सवाल उठ रहा है कि चार संचालक क्यों नियुक्त किए गए। सतेज पाटील के पास बहुमत था, फिर भी सरकार ने नियुक्ति की, इससे सारा हिसाब ही बिगड़ गया।
अब गोकुल के मुद्दे पर महायुति की खींचतान सामने आ रही है। सरकार की तरफ से नियुक्त चार सदस्यों को लेकर शिवसेना नाराज है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना का सीधा कहना है कि जो सदस्य लोकतांत्रिक तरीके से चुनकर आए हैं, उन्हें स्वीकार करना चाहिए और जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए।
भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक शिवसेना ने साफ कहा है कि वह भाजपा और राष्ट्रवादी की भूमिका से सहमत नहीं है। इससे महायुति का विवाद फिर उभरा है। पिछले कुछ दिनों से शिवसेना और भाजपा के बीच काफी तनातनी है, स्नातक चुनाव को लेकर भी विवाद भड़का था।
गोकुल को लेकर महायुति में हलचल तेज हो गई है। चार संचालक नियुक्त होने से दोनों पार्टियों का झगड़ा बढ़ता दिख रहा है। अब देखना होगा कि क्या हल निकलता है। राहुल गांधी ने भी इस पर टिप्पणी की थी।
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