मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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गोकुल अध्यक्ष चुनाव: सरकारी सदस्यों को वोट का हक देने के लिए अध्यादेश की संभावना

गोकुल अध्यक्ष चुनाव: सरकारी सदस्यों को वोट का हक देने के लिए अध्यादेश की संभावना तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 राजनीति डेस्क

कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ यानी गोकुल में चार सरकारी सदस्यों पर आज फैसला होने की संभावना है। अध्यक्ष चुनाव में उनके वोट के अधिकार पर अध्यादेश निकल सकता है।

कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ, यानी गोकुल, के चुनाव से शुरू हुई सियासत अब भी थमने का नाम नहीं ले रही। इस चुनाव में प्रचार, मतदान और मतगणना, तीनों दौर में जबरदस्त टक्कर देखने को मिली थी। सतेज पाटील (Satej Patil) की अगुवाई वाले समविचारी गठबंधन ने महायुति को 13 के मुकाबले 12 सीटों से हराया था।

लेकिन बहुमत बहुत मामूली होने की वजह से अब गोकुल के अध्यक्ष पद के चुनाव में काफी उतार-चढ़ाव दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसी बीच महायुति की ओर से एक बड़ा दांव खेला जा सकता है। गोकुल दूध संघ में चार सरकारी सदस्यों को लेकर आज फैसला होने की संभावना है। साथ ही अध्यक्ष चुनाव में इन सरकारी सदस्यों को वोट देने का अधिकार देने के लिए अध्यादेश निकाले जाने की भी संभावना जताई जा रही है।

अगर ये चारों सरकारी सदस्य महायुति की सोच के निकले, तो गोकुल की सत्ता महायुति के हाथ में जा सकती है। इसी वजह से अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर भी खूब रंगारंग सियासत देखने को मिलेगी।

अध्यक्ष चुनाव की पहली बैठक से ही जिस बात की संभावना जताई जा रही थी, वह अब सच होती दिख रही है। सरकारी सदस्यों की नियुक्ति करना, उन्हें वोट का अधिकार देना और इस तरह सत्ता अपने पक्ष में करना, महायुति की यही कोशिश थी। उसी दिशा में अब कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए गोकुल में चार सरकारी निदेशकों की नियुक्ति की जाएगी।

सरकारी सदस्यों के तौर पर शौमिका महाडिक, नवीद मुश्रीफ और अशोक फराकटे के नाम तय कर दिए गए हैं। चौथा नाम आज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बातचीत के बाद तय किया जाएगा, ऐसी जानकारी है। अगर इन चारों सरकारी सदस्यों ने अध्यक्ष चुनाव में महायुति के पक्ष में वोट दिया, तो गोकुल की सत्ता महायुति के पास चली जाएगी।

मौजूदा सहकारिता कानून के हिसाब से सरकारी सदस्यों को वोट देने का अधिकार नहीं है। मगर सरकार अध्यादेश निकालकर उन्हें भी अध्यक्ष चुनाव में वोट का अधिकार दे सकती है। ऐसा हुआ तो महायुति गोकुल की सत्ता अपनी तरफ खींचने में कामयाब हो जाएगी।

चुनाव में समविचारी पैनल के 13 और महायुति पैनल के 12 निदेशक जीते थे। यानी सतेज पाटील के समविचारी गठबंधन को मामूली बहुमत मिला था। पर कोरम पूरा करने के लिए 14 निदेशक चाहिए। समविचारी गठबंधन के पास एक निदेशक कम है और ऐसा लगता है कि महायुति ने इसी बात का फायदा उठाया है। अब अगले कुछ घंटों में गोकुल को लेकर कोल्हापुर में क्या होता है, इस पर सबकी नजर टिकी है।

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