गोकुल में हारे नवीद मुश्रीफ और शौमिका महाडिक की वापसी के आसार, सरकार नियुक्त करेगी 5 संचालक
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कैबिनेट ने 500 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले सहकारी संघों में 5 संचालक नियुक्त करने का फैसला किया है।
मुंबई: गोकुल (Gokul) के चुनाव पर पूरे राज्य की नजर थी। इसमें कांग्रेस नेता सतेज पाटील की अगुवाई वाले गठबंधन ने 13 सीटें जीतीं। भाजपा महायुति की अगुवाई में लड़ रहे मंत्री हसन मुश्रीफ के गठबंधन को 12 सीटें मिलीं। इसी चुनाव में हसन मुश्रीफ के बेटे नाविद मुश्रीफ और विधायक अमल महाडिक की पत्नी शौमिका महाडिक हार गए थे। अब सहकार को लेकर राज्य सरकार के नए फैसले से इन दोनों के फिर से गोकुल के संचालक बनने की संभावना बताई जा रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की कैबिनेट ने आज सहकार से जुड़ा अहम फैसला लिया। इसके मुताबिक राज्य की जिन सहकारी संघीय संस्थाओं का सालाना टर्नओवर पांच सौ करोड़ से ज्यादा है, उनकी समितियों पर सरकार की तरफ से पांच सदस्य नामित किए जाएंगे। इनमें एक अधिकारी सहायक निबंधक के दर्जे से कम का नहीं होगा और चार लोग ऐसे होंगे जिन्हें संस्था के काम का अनुभव हो। सरकारी अधिकारी को वोट देने का अधिकार नहीं होगा। बाकी चारों को संचालक मंडल में वोट का अधिकार रहेगा, लेकिन वे संस्था के पदाधिकारी पद का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
यह सुधार जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों पर लागू नहीं होगा। महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 की धारा 73 अअअ (2) के परंतुक में नया परंतुक जोड़ने की मंजूरी देकर यह नियम बनाया गया है। इस वजह से अब गोकुल दूध संघ के चेयरमैन पद का चुनाव खास हो गया है, क्योंकि सरकार के 5 सदस्यों की नियुक्ति के बाद भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन को चेयरमैन पद का मौका मिल सकता है। नाविद मुश्रीफ और शौमिका महाडिक को सरकार नियुक्त सदस्यों में जगह मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
चर्चा में जो नाम हैं, उनमें हसन मुश्रीफ के बेटे नवीद मुश्रीफ, पूर्व संचालिका शौमिका महाडिक, ए.वाय. पाटील और अशोक फरकटे शामिल हैं। इन नामों के सामने आने के बाद सहयोगी दलों में नाराज़गी उभरी है और उन्होंने जिले के नेताओं से इसे जाहिर किया है। महायुति में इन दलों को सरकार नियुक्त सदस्यों की चुनाव में मौका देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब नेताओं के ही बच्चों को जगह मिलने से इन सहयोगी दलों के हाथ खाली रहेंगे। राज्यपाल की तरफ से अध्यादेश निकलने के बाद नए संचालकों की नियुक्ति का रास्ता खुल जाएगा।
इस फैसले पर सतेज उर्फ बंटी पाटील ने नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जितने भी कानूनी रास्ते हैं, वे सब अपनाएंगे और चुप नहीं बैठेंगे। उनके मुताबिक साढ़े पांच लाख किसानों ने यह जनादेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों का जनाधार नकारा जा रहा है तो सड़क पर उतरने की तैयारी भी उन्होंने रखी है।
मौजूदा कानून के तहत सहकारी संस्थाओं के संचालक मंडल में संस्था के चुने हुए 2 संचालक और सरकार की तरफ से नामित 2 संचालक नियुक्त किए जा सकते हैं। मझोली और छोटी संस्थाओं के लिए यह इंतजाम ठीक है। लेकिन जिन संघों का सालाना टर्नओवर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा है, उनके पास बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निधि और कारोबारी जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे संघों के संचालक मंडल में सदस्यों की संख्या बराबर हो जाए या बैठक का कोरम पूरा न हो, तो उलझन की स्थिति बनती है। तब मजबूरी में निबंधक को संस्था पर प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त करना पड़ता है, जिसका संस्था के आर्थिक और दूसरे कामकाज पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए कोरम की कमी से प्राधिकृत अधिकारी बैठाने की नौबत न आए और संस्था का प्रबंधन सदस्यों के चुने संचालक मंडल के पास रहे, इसके लिए सरकार 5 संचालक नियुक्त करेगी। इनमें सरकारी अधिकारी को छोड़कर बाकी सदस्यों को समिति की बैठक में वोट का अधिकार दिया जाएगा।
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