गोकुल में सरकार ने चार संचालक क्यों बिठाए, फडणवीस बोले: वरना दोबारा चुनाव कराना पड़ता
गोकुल दूध संघ में चेयरमैन का चुनाव अटका तो सरकार ने चार संचालक नियुक्त किए। विपक्ष के आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी।
गोकुल दूध संघ के चुनाव में किसी भी पक्ष को बहुमत नहीं मिला। इसी वजह से संघ में चेयरमैन चुनना मुश्किल हो गया है। इस हालत में राज्य सरकार ने गोकुल में चार संचालक नियुक्त करने का फैसला किया। कांग्रेस नेता सतेज पाटील समेत विपक्ष ने इस पर सत्ताधारियों को घेरा है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव जीतकर आना नहीं हो पा रहा, इसलिए पिछले दरवाजे से गोकुल पर कब्जा करने की चाल चली गई है।
इन आरोपों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार जवाब दिया है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि अगर गोकुल पर संचालक नहीं नियुक्त किए जाते, तो संघ का चुनाव फिर से कराना पड़ता।
फडणवीस ने यह बात पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कही। उनके मुताबिक 13 सीटें जीतने के बाद भी कोरम पूरा नहीं हो रहा, इसलिए चेयरमैन नहीं चुना जा सकता। चेयरमैन चुनने के लिए कम से कम 14 सदस्य चाहिए, और इसी से कानूनी पेच फंस गया है। उन्होंने बताया कि चेयरमैन के चुनाव के लिए दो-तीन बार बैठक हुई। हर बार कोरम पूरा न हो तो चुनाव ही रद्द हो जाएगा। इसीलिए सरकार ने चार सदस्य नियुक्त करने का फैसला लिया। कुछ लोग कह रहे हैं कि यह फैसला टिकेगा नहीं, लेकिन फडणवीस ने साफ किया कि सरकार ने एडवोकेट जनरल की राय लेकर ही यह कदम उठाया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गोकुल के चुनाव पर ट्वीट करके इसे वोट चोरी बताया था। फडणवीस ने इस पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पर कैसी नौबत आ गई है कि प्रधानमंत्री पद का सपना देखने वाला आदमी एक छोटे से चुनाव पर ट्वीट कर रहा है। गोकुल में सिर्फ साढ़े चार हजार मतदाता हैं, फिर भी राहुल गांधी को दिल्ली में बैठकर ट्वीट करना पड़ रहा है। फडणवीस के मुताबिक यह राष्ट्रीय मुद्दा नहीं है, पर राहुल गांधी इसमें भी कूद पड़े हैं।
अब नियम की बात। गोकुल में कुल 25 सदस्य हैं। महाराष्ट्र सहकारी कानून और गोकुल के बायलॉज के हिसाब से बहुमत के लिए 14 सदस्य जरूरी हैं। सतेज पाटील के पास 13 सदस्य हैं, जबकि महायुति के पास 12। 14 सदस्य न हों तो कोरम पूरा नहीं होता, और कोरम पूरा न हो तो चेयरमैन नहीं चुना जा सकता।
चेयरमैन के चुनाव के लिए एक बैठक हुई थी, जिसमें सिर्फ 13 सदस्य पहुंचे। महायुति के 12 सदस्य गैरहाजिर रहे। कोरम पूरा न होने से बैठक रद्द कर दी गई और चेयरमैन नहीं चुना जा सका। सूत्रों के मुताबिक ऐसी दो-तीन बैठकें रद्द हो जाएं तो गोकुल पर सीधे प्रशासक बिठाया जा सकता है, और उसके बाद चुनाव कराए जाते हैं। उन चुनावों से बचने के लिए सरकार ने चार सदस्य नियुक्त करने का बीच का रास्ता निकाला है।
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