गोकुळ में सरकार के 4 नामित निदेशकों पर कैबिनेट की मुहर, जितेंद्र आव्हाड ने की कड़ी आलोचना
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
महायुती सरकार ने गोकुळ दूध संघ में चार शासन नियुक्त विशेषज्ञ निदेशक रखने का फैसला किया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने इस पर सरकार को घेरा।
गोकुल दूध संघ के चुनाव पर पूरे राज्य की नजर थी। इस चुनाव में सतेज पाटील की अगुवाई वाले गठबंधन ने 13-12 के फर्क से जीत हासिल की। भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 12 सीटें जीतीं और सिर्फ दो सीटों के अंतर से उसके हाथ से चेयरमैन का पद निकल गया। फिलहाल संघ के चेयरमैन पद का चुनाव हुआ नहीं है और इसी बीच एक नया मोड़ आ गया है।
यह मोड़ मंत्रिमंडल की बैठक के एक फैसले से आया है। महायुति सरकार ने गोकुल दूध संघ में शासन नियुक्त चार (स्वीकृत) विशेषज्ञ निदेशक नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सिर्फ इतना ही नहीं, इन चार स्वीकृत सदस्यों को सहकारी संस्थाओं में वोट देने का अधिकार भी दिया गया है। इस वक्त गोकुल में सतेज (बंटी) पाटील के गुट का बहुमत है। लेकिन सरकार बाहर से चार सदस्य नियुक्त करके उन्हें वोट का हक दे दे, तो अध्यक्ष के चुनाव की तस्वीर बदल सकती है। इसी वजह से महाविकास अघाड़ी, खासकर सतेज पाटील की तरफ से इस फैसले का तीखा विरोध हो रहा है। सतेज पाटील ने इसे लोकतंत्र का गला घोंटना यानी लोकतंत्र का गला दबाना कहा था।
राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने भी इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट लिखकर सत्ताधारियों पर निशाना साधा। आव्हाड का कहना है कि गोकुल के चुनाव में सत्ताधारियों की आबरू पूरी तरह चली गई है। उनके मुताबिक पूरा सत्ताधारी वर्ग एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहा था, फिर भी बंटी पाटील ने जनता के समर्थन के दम पर जीत छीन ली। आव्हाड ने कहा कि यह बात सत्ताधारी गुट को अब तक हजम होती नहीं दिख रही। उनका आरोप है कि आज उन्होंने गोकुल पर चार शासन नियुक्त सदस्य बिठा दिए हैं और जल्द ही इन सदस्यों को वोट देने का अधिकार भी दे देंगे।
आव्हाड ने कोल्हापुर की जनता से अपील की कि वह इस मामले पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि कोल्हापुर समता की भूमि है, शाहू महाराज की भूमि है, और यह इन मदमस्त सत्ताधारियों को दिखाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी कल परसों ही भाजपा ने "लोकतंत्र बचाओ" के नाम पर देशभर में रैलियां निकाली थीं, और आज यही लोग सिर्फ एक हार से बौखलाकर लोकतंत्र की लाश गिरा रहे हैं। आखिर में आव्हाड ने कोल्हापुर के लोगों से कहा कि यह वक्त "आर-पार करने का" है, यानी आर-पार का फैसला करने का है। गोकुल की राजनीति को लेकर यह अपील उन्होंने जनता से की है।
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