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उल्हासनगर में सातवीं से बारहवीं की छात्राओं को साल में 6 हजार रुपये की मदद

उल्हासनगर महापालिका ने ज्योति कालानी लाडकी विद्यार्थिनी योजना शुरू की है। अब तक 19 हजार छात्राओं ने नाम दर्ज कराया है।

उल्हासनगर में सातवीं से बारहवीं की छात्राओं को साल में 6 हजार रुपये की मदद तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

लड़कियों की पढ़ाई पैसों की कमी की वजह से न रुके, इसके लिए उल्हासनगर नगर निगम ने एक नई योजना शुरू की है। योजना का नाम है 'ज्योति कालानी लाडकी विद्यार्थिनी योजना'। यह 'लाडकी बहीण' योजना की तर्ज पर चलाई जाएगी और इसमें स्कूल जाने वाली छात्राओं को सीधी आर्थिक मदद मिलेगी।

बताया गया है कि यह पहल सांसद श्रीकांत शिंदे की संकल्पना से शुरू हुई है।

योजना के तहत सातवीं से बारहवीं तक पढ़ने वाली पात्र छात्राओं को साल में छह हजार रुपये की मदद दी जाएगी। यानी हर महीने के हिसाब से देखें तो करीब 500 रुपये के बराबर रकम बनती है। इस पैसे का इस्तेमाल स्कूल का सामान, कॉपी-किताबें और पढ़ाई से जुड़े छोटे-बड़े खर्चों में हो सकता है।

योजना का मकसद छात्राओं की पढ़ाई को बढ़ावा देना है। साथ ही उनके परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम करना है, ऐसा बताया गया है।

अब तक इस योजना के लिए 19 हजार छात्राओं के नाम दर्ज हो चुके हैं। इसका असर नगर निगम के बजट पर भी पड़ेगा। मिली जानकारी के मुताबिक योजना पर लगभग 9 करोड़ 87 हजार रुपये के खर्च का जिक्र किया गया है।

योजना का उद्घाटन सांसद श्रीकांत शिंदे के जनसंपर्क कार्यालय से हुआ। उल्हासनगर की मेयर अश्विनी निकम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर इसकी जानकारी दी।

इस कार्यक्रम में महायुति के सहयोगी दल भाजपा के पार्षद और उप मेयर मौजूद नहीं थे। इसके बाद शिवसेना और भाजपा के बीच अंदरूनी मतभेद को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि उनके न आने की असल वजह अभी साफ नहीं हुई है।

योजना का ऐलान हो चुका है, लेकिन छात्राओं और उनके अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं। पात्रता की शर्तें क्या होंगी, अर्जी कैसे भरनी होगी, कौन-कौन से कागजात लगेंगे और असल में पैसे कब मिलेंगे, इन सब पर सबकी नजर है। नगर निगम की तरफ से आधिकारिक दिशानिर्देश जारी होने के बाद ही अर्जी की प्रक्रिया साफ हो पाएगी।

कुल मिलाकर, लड़कियों की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद देने वाली यह पहल अहम साबित हो सकती है। लेकिन इसकी कामयाबी इसी पर टिकी है कि पैसा समय पर मिले और मदद सचमुच हर पात्र छात्रा तक पहुंचे।

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