रंगारगल्ली में मालिकों के विरोध से अटका मलबा हटाने का काम, महापौर समीर राजूरकर की दखल के बाद रास्ता साफ
छत्रपति संभाजीनगर की रंगारगल्ली में सड़क चौड़ीकरण की जद में आई खतरनाक इमारत का मलबा हटाने पहुंची नगर निगम की टीम को शनिवार को विरोध झेलना पड़ा। कार्रवाई करीब दो घंटे रुकी रही और दोपहर के बाद मलबा हटाया गया।
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छत्रपती संभाजीनगर में सड़क चौड़ीकरण की जद में आई रंगारगल्ली की एक खतरनाक इमारत का मलबा हटाने के लिए शनिवार, 24 अक्टूबर को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। वहां उसे जगह के मालिकों के विरोध का सामना करना पड़ा। संबंधित परिवार ने साफ रुख लिया कि जगह का मुआवज़ा मिलने के बाद ही वे कब्जा देंगे। इसी वजह से कार्रवाई करीब दो घंटे तक रुकी रही।
आखिर में महापौर समीर राजूरकर ने बीच में पड़कर मध्यस्थता की। उन्होंने संबंधित लोगों से बातचीत की, जिसके बाद विरोध ठंडा पड़ गया और मलबा हटाने का रास्ता खुल गया। दोपहर के बाद मलबा हटा दिया गया।
यह मामला गुलमंडी से सिटीचौक की तरफ जाने वाली रंगारगल्ली का है। यहां सुंदर दूध डेयरी की खतरनाक इमारत को नगर निगम ने पिछले साल जमीनदोस्त कर दिया था। चूंकि यह इमारत सड़क के रास्ते में आ रही थी, इसलिए उसका मलबा हटाकर जगह का कब्जा लेना जरूरी था।
यह जगह मेघावाले के मालिकाना हक की है। उसका कब्जा नगर निगम के पास नहीं आया, इसलिए इस हिस्से में सीमेंट रोड का काम भी अटका हुआ था। इतना ही नहीं, वहां एक छोटी दुकान भी शुरू हो गई थी, जिससे ट्रैफिक में रुकावट आ रही थी।
इसी पृष्ठभूमि में शनिवार को उपायुक्त सविता सोनवणे के मार्गदर्शन में नगर निगम की टीम मलबा हटाने के लिए वहां पहुंची थी। उस वक्त मेघावाले परिवार ने कहा कि मुआवज़ा मिले बिना वे कब्जा नहीं देंगे और कार्रवाई का विरोध किया। अधिकारियों ने उन्हें मुआवज़े के लिए आवेदन करने की सूचना दी।
यह कार्रवाई आयुक्त अमोल येडगे के आदेश पर अतिक्रमण हटाओ विभाग के नियंत्रण अधिकारी संतोष वाहुळे की अगुवाई में की गई। मौके पर उपायुक्त सविता सोनवणे, सहायक आयुक्त संजय सुरडकर, वार्ड एक की सहायक आयुक्त लता पुजारी, इमारत निरीक्षक रविंद्र देसाई, सुंदर खरात और नागरिक मित्र दस्ता मौजूद थे।
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