वाशिम में सोयाबीन और तूर के कुटार की जमाखोरी पर कार्रवाई के आदेश
वाशिम जिला प्रशासन ने पशुओं के चारे की कमी रोकने के लिए सोयाबीन और तूर के कुटार की बिक्री और इस्तेमाल पर संशोधित आदेश जारी किए हैं।
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वाशिम जिले के जानवरों को भरपूर चारा मिलता रहे और आगे चारे की कमी हो तो उससे निपटा जा सके, इसी मकसद से जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। जिलाधिकारी ने अपील के साथ-साथ आदेश भी दिए हैं। इसका असर यह है कि जिले में पशुधन के लिए चारा बचाकर रखने के उपाय शुरू हो गए हैं।
जिला दंडाधिकारी योगेश कुंभेजकर ने सोयाबीन और तूर की फसल के कुटार (चारा) के इस्तेमाल और बिक्री को लेकर संशोधित आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों के मुताबिक जिले का कुटार मुख्य रूप से जानवरों के चारे के लिए रखा गया है। बायोमास ब्रिकेट्स और पेलेट्स बनाने वाले उद्योग प्रशासन के मार्गदर्शन में ही कुटार खरीद सकेंगे और उसका इस्तेमाल कर सकेंगे।
जिन किसानों के पास अपने जानवर नहीं हैं, उनसे कहा गया है कि कुटार बेचते समय सबसे पहले अपने इलाके के पशुपालक किसानों को चारे के तौर पर देने को तरजीह दें। उसके बाद जो कुटार बचे, वही बायोमास ब्रिकेट्स और पेलेट्स बनाने वाले उद्योगों या दूसरे कारोबारियों को दिया जाए।
जिन किसानों के पास अपने जानवर हैं, उन्हें पहले अपने जानवरों के लिए पूरे साल के चारे का पक्का इंतजाम करना होगा। उसके बाद ही बचा हुआ कुटार बिक्री के लिए रखा जा सकता है। ऐसा चारा बेचने वाले किसानों पर आगे सरकार की चारा वितरण योजना के प्रतिबंध लागू रहेंगे। इसके लिए तय नमूने में प्रमाणपत्र तालुका अधिकारियों के पास जमा करना जरूरी होगा।
अपना कुटार और चारा बायोमास ब्रिकेट्स बनाने वाले या दूसरे उद्योगों को बेचने वाले किसानों को आगे सरकार की चारा और चारा वितरण योजना का फायदा नहीं मिलेगा। इसके साथ ही उद्योगों के लिए 50 प्रतिशत स्टॉक रिजर्व रखना जरूरी किया गया है।
बायोमास ब्रिकेट्स और पेलेट्स बनाने वाले उद्योग समूह के पास रोज जितना कुटार आता है, उसका कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा सरकार की जरूरत के हिसाब से किसानों के लिए रिजर्व रखना अनिवार्य है। इस रिजर्व स्टॉक की जानकारी हर हफ्ते संबंधित तहसीलदार और तालुका पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय विकास अधिकारी को देनी होगी।
आदेश में यह भी साफ किया गया है कि आगे जिले में चारे की कमी की हालत बनी तो ब्रिकेट्स उद्योगों के पास रखा रिजर्व और मौजूद चारा और कुटार प्रशासन की चारा कमी से निपटने की योजनाओं के लिए अपने कब्जे में ले लिया जाएगा। जो लोग जिले में कुटार की अवैध जमाखोरी करेंगे या नकली कमी पैदा करेंगे, उन पर कार्रवाई होगी।
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