उल्हासनगर में रिक्शा के अंदर महिला की सुरक्षित डिलीवरी, पुलिस कर्मचारी और डॉक्टरों की फुर्ती
उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल के प्रवेशद्वार के पास पुलिस कर्मचारी सतीश करले और डॉक्टरों की मदद से रिक्शा में ही महिला की सुरक्षित डिलीवरी हुई। मां और बच्चे की हालत स्थिर है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
उल्हासनगर में पुलिस कर्मचारी और डॉक्टरों की फुर्ती की वजह से एक महिला की रिक्शा के अंदर ही सुरक्षित डिलीवरी हो गई। यह घटना उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल के प्रवेशद्वार के पास हुई। पुलिस कर्मचारी सतीश करले ने मौके पर समझदारी दिखाई, इसलिए महिला को वक्त पर मदद मिल सकी।
सतीश करले उल्हासनगर के सेंट्रल हॉस्पिटल में गार्ड ड्यूटी पर तैनात हैं। वे हॉस्पिटल के सामने टहल रहे थे, तभी हॉस्पिटल के प्रवेशद्वार के पास खड़े एक रिक्शा से उन्हें अचानक किसी महिला के चिल्लाने की आवाज़ सुनाई दी। वे फौरन रिक्शा की तरफ दौड़े। वहां जाकर देखा तो महिला को तेज़ प्रसव पीड़ा हो रही थी।
तब तक डिलीवरी शुरू हो चुकी थी और बच्चे का कुछ हिस्सा बाहर आ गया था। महिला का पति घबराया हुआ था और मदद के लिए गुहार लगा रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे और क्या न करे। ऐसे में करले का वहां पहुंच जाना उनके लिए राहत की बात रही। करले ने महिला के पति को हौसला भी दिया।
हालात की गंभीरता समझते हुए करले तुरंत हॉस्पिटल के अंदर गए और डॉक्टरों को पूरी बात बताई। इसके बाद डॉक्टर भी बिना वक्त गंवाए रिक्शा के पास पहुंच गए।
डॉक्टरों और पुलिस कर्मचारी की मदद से यह फैसला लिया गया कि महिला की डिलीवरी रिक्शा में ही कराई जाए। इसके बाद महिला ने रिक्शा में ही एक प्यारे से बच्चे को जन्म दिया।
ऐन वक्त पर दिखाई गई फुर्ती और आपसी तालमेल की वजह से डिलीवरी के दौरान महिला को मदद मिल सकी। पुलिस कर्मचारी सतीश करले और डॉक्टरों ने वक्त रहते दौड़ लगाई, जिससे इस मुश्किल घड़ी में पति-पत्नी को बड़ी मदद मिली।
जानकारी के मुताबिक मां और बच्चे की हालत फिलहाल स्थिर है। दोनों का आगे का इलाज सेंट्रल अस्पताल में ही चल रहा है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।