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ऑटोमोबाईल प्रॉडक्ट्स ऑफ इंडिया को तिमाही में 46.62 लाख रुपये का घाटा, नेट वर्थ नेगेटिव

सितंबर 2026 में खत्म तिमाही में कंपनी को 46.62 लाख रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। ब्याज का खर्च 40.92 लाख रुपये रहा और कुल आमदनी सिर्फ 18.02 लाख रुपये।

ऑटोमोबाईल प्रॉडक्ट्स ऑफ इंडिया को तिमाही में 46.62 लाख रुपये का घाटा, नेट वर्थ नेगेटिव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ऑटोमोबाईल सेक्टर से जुड़ी कंपनी ऑटोमोबाईल प्रॉडक्ट्स ऑफ इंडिया लिमिटेड की माली हालत इन दिनों चर्चा में है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही में कंपनी को 46.62 लाख रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है।

ऑडिटरों ने लिखा है कि कंपनी की नेट वर्थ पूरी तरह खत्म हो चुकी है। उन्होंने इस बात पर भी अनिश्चितता जताई है कि आगे कंपनी का कामकाज चालू रह पाएगा या नहीं।

कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई से सितंबर 2026 के बीच ऑपरेशंस से आमदनी 4.25 लाख रुपये पर टिकी रही। पिछले साल की इसी तिमाही में भी आमदनी इतनी ही थी। दूसरे स्रोतों से 13.77 लाख रुपये मिले, जिससे कुल आमदनी 18.02 लाख रुपये हो गई।

कंपनी के सामने सबसे बड़ी मुश्किल कर्ज पर ब्याज का खर्च है। इस तिमाही में फायनेंस कॉस्ट 40.92 लाख रुपये रहा, जो कुल आमदनी के दोगुने से भी ज्यादा है। यानी आमदनी के मुकाबले खर्च का बोझ काफी भारी पड़ रहा है।

तुलना करें तो पिछली तिमाही में कंपनी को 79.55 लाख रुपये का घाटा हुआ था। पिछले साल की इसी तिमाही में घाटा 47.62 लाख रुपये था। इससे लगता है कि घाटा कुछ कम हुआ है, फिर भी कंपनी की हालत अब भी तंग दिखती है।

30 सितंबर 2026 को कंपनी की कुल इक्विटी माइनस 1,678.93 लाख रुपये थी। मार्च 2026 में 1,708.89 लाख रुपये रहा लंबी अवधि का कर्ज बढ़कर 1,775.39 लाख रुपये हो गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी के पास कैश और बैंक बैलेंस मिलाकर 1,090 लाख रुपये से ज्यादा हैं। लेकिन इस रकम से कंपनी की पूरी माली दिक्कत दूर हो गई, ऐसा नहीं कहा जा सकता।

ऑडिटरों ने साफ किया है कि कामकाज जारी रखने के लिए कंपनी को होल्डिंग कंपनी और प्रमोटरों से मिलने वाली आर्थिक मदद पर निर्भर रहना पड़ता है। इसी वजह से कंपनी की आगे की आर्थिक स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी ने राइट्स इश्यू के जरिए 13,99,415 इक्विटी शेयर आवंटित किए। इसके बाद पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15.29 प्रतिशत से बढ़कर 34.36 प्रतिशत हो गई। न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियामक नियमों का पालन करने के लिहाज से यह अहम बदलाव है।

कुल मिलाकर आमदनी बढ़ाना, कर्ज का बोझ संभालना और आर्थिक स्थिरता हासिल करना कंपनी के सामने मुख्य चुनौतियां हैं। आगे की तस्वीर इस पर निर्भर करेगी कि कंपनी को कितनी आर्थिक मदद मिलती है और उसके कामकाज में सुधार होता है या नहीं।

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