वसई-विरार में बाढ़ रोकने के लिए महापालिका ने शुरू किया लिडार सर्वे
महापालिका ने अगले 30 साल के विस्तार को देखते हुए पूरे शहर का लिडार सर्वे और बाढ़ का नक्शा बनाने का काम शुरू कर दिया है।
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हर मानसून में पानी में डूब जाने वाले वसई-विरार शहर को बाढ़ से हमेशा के लिए बचाने के लिए महापालिका ने बड़ा कदम उठाया है। महापालिका ने अगले 30 साल में शहर के संभावित विस्तार को सामने रखकर यह काम हाथ में लिया है। पुणे के खडकवासला में मौजूद केंद्रीय जल और विद्युत अनुसंधान केंद्र की मदद से पूरे शहर का हाईटेक लिडार सर्वे और महाबाढ़ का नक्शा तैयार करने का काम शुरू हो गया है।
इस बड़े तकनीकी अध्ययन की शुरुआत हाल ही में महापौर अजीव पाटील्या और महापालिका आयुक्त पृथ्वीराज पी. की खास मौजूदगी में हुई।
कई सालों से बारिश के दिनों में वसई, नालासोपारा और विरार के निचले इलाकों में पानी भर जाता है और आम लोगों की जिंदगी थम जाती है। साल 2018 में महापालिका ने 12 करोड़ रुपये खर्च करके एक शुरुआती अध्ययन करवाया था। उस रिपोर्ट के आधार पर कम समय और लंबे समय की योजनाएं बनीं, लेकिन पैसों की कमी की वजह से कई प्रोजेक्ट अटके रह गए। अब इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।
नए सर्वे में तीन बातों पर खास ध्यान रहेगा। पहली बात 30 साल का विजन है। बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए अगले तीन दशक के लिए ऐसा सिस्टम खड़ा करना है, जिसमें बारिश का पानी कुदरती तरीके से और तेजी से निकल जाए। दूसरी बात ज्वार-भाटे का अध्ययन है। समंदर के ज्वार का नालों के पानी के उलटे बहाव पर क्या असर पड़ता है, यह समझने के लिए गणित के आधुनिक मॉडल से अध्ययन किया जाएगा। तीसरी बात बुनियादी कमियों की मैपिंग है। लिडार तकनीक से शहर के छोटे-छोटे ऊंचे-नीचे हिस्से, रुकावटें और बाढ़ की आशंका वाले इलाके सही-सही नक्शे पर आ जाएंगे।
तकनीकी रिपोर्ट आने से पहले ही महापालिका ने अपने पैसों से कई काम शुरू कर दिए हैं ताकि फिलहाल राहत मिले। सनसिटी गास रोड, आचोळे मेन रोड, नवघर ईस्ट रोड, विरार-खारोडी (बोळींज) और सेंट्रल पार्क जैसे निचले इलाकों की मुख्य सड़कों की ऊंचाई चरणों में बढ़ाई गई है। इसके अलावा निळेमोरे में बारिश का फालतू पानी जमा करने के लिए प्राइवेट डेवलपरों के साथ मिलकर एक अहम होल्डिंग पॉण्ड बनाने की योजना पर काम चल रहा है।
बारिश में नालासोपारा और विरार के बीच रेल की पटरियों पर पानी भर जाने से मध्य और पश्चिम रेलवे की ट्रेनें अक्सर रुक जाती हैं। इस रुकावट को दूर करने के लिए महापालिका ने रेलवे प्रशासन को 26 करोड़ 71 लाख रुपये सौंपे थे। इस रकम से तीन अहम जगहों पर बड़े रेलवे कल्व्हर्ट बनकर तैयार हो गए हैं। ये जगहें हैं नालासोपारा की उत्तर तरफ, नालासोपारा-विरार के बीच दक्षिण तरफ और वसई रोड-नालासोपारा के बीच। इनसे पटरियों के नीचे से पानी पहले के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से निकलने में मदद मिलेगी।
पूरे बाढ़ नियंत्रण प्लान को लागू करने के लिए महापालिका ने राज्य सरकार से 295 करोड़ रुपये के खास फंड की मांग की है। इस प्रोजेक्ट को महाराष्ट्र रिझिलन्स डेव्हलपमेंट प्रोग्राम के तहत वर्ल्ड बैंक की मदद से पूरा करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।
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