सोलापुर में इस बार क्षमता के हिसाब से मिलेंगे पटाखा स्टॉल, अगले साल सब होम मैदान पर
दिवाली से पहले सोलापुर महानगरपालिका ने पटाखा स्टॉल के बंटवारे पर फैसला लिया है। इस साल जगह की क्षमता के मुताबिक स्टॉल लगेंगे और बाकी विक्रेताओं को होम मैदान मिलेगा।
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दिवाली को देखते हुए सोलापुर महानगरपालिका ने शहर के पटाखा स्टॉल का मसला सुलझाने के लिए अहम फैसला लिया है। इस साल वीर सावरकर मैदान और चार हुतात्मा पुतला के पीछे वाले पार्क स्टेडियम में जितनी जगह है, उसकी क्षमता के हिसाब से ही स्टॉल लगाने की इजाजत दी जाएगी। बाकी स्टॉल वालों को होम मैदान पर जगह दी जाएगी।
अगले साल से शहर के सभी पटाखा स्टॉल होम मैदान पर शिफ्ट करने के लिए पटाखा स्टॉल एसोसिएशन ने सहमति दे दी है। यह फैसला महापौर विनायक कोंड्याल की अध्यक्षता में महापौर कार्यालय में हुई बैठक में लिया गया।
प्रशासन ने साफ किया कि दिवाली के वक्त पटाखे खरीदने के लिए लोगों की बहुत भीड़ होती है। इसलिए स्टॉल लगाते समय लोगों की सुरक्षा, फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के आने-जाने का रास्ता, जरूरी खुली जगह और सरकारी नियमों का पालन सबसे पहले देखा जाएगा। जगह से ज्यादा स्टॉल लगे तो इमरजेंसी में दिक्कत हो सकती है और जान का खतरा बन सकता है। महापौर कोंड्याल ने बैठक में कहा कि सुरक्षा के नियमों पर कोई समझौता नहीं होगा।
वीर सावरकर मैदान और चार हुतात्मा पुतला के पीछे वाली जगह पर हर साल पटाखा बेचने के लिए जगह दी जाती है। लेकिन दोनों जगहों की क्षमता सीमित है, इसलिए इस बार नियमों के मुताबिक जितने स्टॉल सुरक्षित तरीके से लग सकते हैं, उतनों को ही इजाजत मिलेगी। एसोसिएशन से कहा गया है कि इन जगहों पर पहले से धंधा करने वाले अधिकृत स्टॉल वालों के नाम महानगरपालिका को दें। उसी हिसाब से पात्र पुराने स्टॉल वालों को जगह देने की योजना बनेगी। जगह की क्षमता तय होने के बाद ही स्टॉल का आखिरी बंटवारा होगा, इसलिए इस लिस्ट की अहमियत बढ़ गई है।
फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आसानी से आ-जा सकें, इसके लिए पटाखा बिक्री की जगह पर काफी खाली जगह रखना जरूरी है। बैठक में स्टॉल के बीच सुरक्षित दूरी रखने, भीड़ का सही इंतजाम करने और विक्रेताओं के लिए बुनियादी सुविधाएं देने पर भी बात हुई। महानगरपालिका सारे नियम पूरे होने के बाद ही स्टॉल लगाने की इजाजत देगी।
महापौर कोंड्याल ने कहा कि पटाखा बिक्री की जगह पर लोगों की बड़ी भीड़ होती है, इसलिए सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। स्टॉल की गिनती बढ़ाने से ज्यादा अहम लोगों की सुरक्षा है। नियम तोड़कर स्टॉल लगे तो इमरजेंसी में गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए हर जगह की उपलब्ध जगह देखकर ही इजाजत दी जाएगी।
पटाखा विक्रेता दिवाली से करीब तीन महीने पहले से माल खरीदकर धंधे की तैयारी कर लेते हैं। ऐसे में इसी साल सारे स्टॉल अचानक दूसरी जगह भेजे जाते तो विक्रेताओं को आर्थिक नुकसान हो सकता था। यह देखते हुए प्रशासन ने इस साल पुरानी जगहों पर क्षमता के मुताबिक स्टॉल वालों को जगह देने का फैसला किया। बाकी विक्रेताओं को होम मैदान पर जगह मिलेगी। अगले साल से सभी स्टॉल एक ही जगह यानी होम मैदान पर शिफ्ट करने का इंतजाम किया जाएगा।
बैठक में उपमहापौर ज्ञानेश्वरी देवकर, सदन के नेता नरेंद्र काले, शहराध्यक्ष और पार्षद रोहिणी तडलवकर, अतिरिक्त आयुक्त वीणा पवार, पुलिस उपायुक्त विजयालक्ष्मी कुरी, नगर अभियंता नीलकंठ मठपती और फायर ब्रिगेड विभाग प्रमुख राकेश सालुंखे मौजूद थे। पटाखा स्टॉल एसोसिएशन के सुनील रसाले, बसवराज येरटे, गौरव बेंद्रे, अनिल सावंत, सुनील कत्ते, सन्मित्र काटकर, बालासाहेब दर्गोपाटील, मनोज जगताप, सुरेश चंद्रगुप्ता, माउली भोजरंगे, गणेश साठे, अंकिता भुजंग और गणेश घाडगे वगैरह भी बैठक में शामिल हुए।
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