मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

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13:09 IST

नागपुर में विजयादशमी पर भागवत बोले, आंदोलन कानून और भाईचारे की हद में हों

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में विजयादशमी उत्सव पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने भारत की बढ़ती साख का जिक्र किया और आंदोलनों को संवैधानिक दायरे में रखने की बात कही।

नागपुर में विजयादशमी पर भागवत बोले, आंदोलन कानून और भाईचारे की हद में हों तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का परंपरागत विजयादशमी उत्सव हुआ। इसमें संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने भाषण दिया। उन्होंने एक तरफ भारत की बढ़ती वैश्विक साख की सराहना की, तो दूसरी तरफ देश को अस्थिर करने में लगी बाहरी और अंदरूनी ताकतों को लेकर चेतावनी दी। भागवत ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया में अराजकता फैलाकर अपना स्वार्थ साधने वाली आसुरी ताकतें भारत की तरक्की को पचा नहीं पा रही हैं।

भागवत ने कहा कि ये बातें आप सब अच्छी तरह समझते हैं, फिर भी वे इन्हें दोहरा रहे हैं, क्योंकि समझदार लोग भी विचलित हो जाएं, ऐसा माहौल है या बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक भारत समेत पूरी दुनिया में जो कुछ भी भद्रता, मांगल्य, सांस्कृतिक और मानवीय संस्कार है, उसे नष्ट-भ्रष्ट और उद्ध्वस्त करने की आसुरी प्रतिज्ञा लेकर पश्चिम से एक आंधी चली है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के तथाकथित प्रगत देश भी इस आंधी से त्रस्त और असहाय हैं। भागवत के अनुसार पिछले दशकों में भारत ने अपनी शक्ति और सुनीति के बल पर दुनिया में धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज का पुरुषार्थ, मजबूत नीतियां, नेतृत्व, देशाभिमान और दुनिया के प्रति अपनी जिम्मेदारी का बोध जागने से देश हर क्षेत्र में कामयाब हो रहा है।

भागवत ने कहा कि भारत की इस प्रगति से उन ताकतों का खेल बंद होगा, जो दूसरे देशों में अराजकता खड़ी करके अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए अपने पिट्ठुओं को वहां बिठाने की साजिश करती हैं। उनका कहना था कि ये आसुरी ताकतें इस हकीकत को जानती हैं, इसीलिए भारत उनका निर्णायक और सबसे बलवान प्रतिस्पर्धी है और उनका आखिरी और सबसे अहम निशाना भी।

संघ प्रमुख ने कहा कि ये ताकतें सोच-विचार कर योजना बनाती हैं कि भारत, हिंदू समाज और संघ को कैसे तोड़ा जाए। उनके मुताबिक इन ताकतों को उन्हीं की प्रवृत्ति के कुछ लोग मदद के लिए मिल जाते हैं, और छोटे सत्तास्वार्थ और विवेकहीनता की वजह से देश के कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी इसमें शामिल हो जाते हैं।

देश में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्ष की तरफ से हो रहे विरोध प्रदर्शनों की ओर इशारा करते हुए भागवत ने कहा कि इतने बड़े समाज में समस्याएं हैं और व्यवस्था में भी ढेर सारी कमियां होंगी। इनकी वजह से आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए।

उन्होंने अपील की कि आंदोलन करने वाला समाज का कोई समूह हो, या शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करने वाला शासन-प्रशासन या राजनीतिक नेता, सबको यह ध्यान रखना चाहिए कि एक अखंड समाज में उनके काम से किसी तरह की अनबन, द्वेष, मलाल या बंटवारा पैदा न हो। भागवत ने कहा कि भावनाएं तीव्र हों, तब भी हमारे काम संविधान और कानून की मर्यादा में और भद्र व्यवहार के दायरे में रहने चाहिए।

भागवत ने यह भी कहा कि वोट, सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक फायदे का लालच हमारे विवेक और सद्भावना पर हावी न हो, इसकी चिंता करनी ही पड़ेगी। आखिर में उन्होंने कहा कि समाज की सारी समस्याएं सिर्फ शासन ही सुलझा सकता है, या आंदोलनों से ही सुलझती हैं, ऐसा अनुभव नहीं है। उनके मुताबिक समाज की सक्रियता और आपसी संवाद के आधार पर भी समस्याओं का हल निकल सकता है।

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