विजयादशमी पर भागवत बोले, रिजीम चेंज से हालात नहीं बदलते, आंदोलन का मकसद समाधान हो
नागपुर में संघ के विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक मोहन भागवत ने आंदोलनों, पश्चिमी दुनिया से उठे तूफान, नेपाल की आपदा और देश की एकता पर बात रखी।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि आंदोलन से समस्याओं का हल निकलना आसान नहीं है। वे नागपुर में संघ के विजयादशमी उत्सव 2026 में बोल रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने दुनिया के हालात, भारत के सामने खड़ी चुनौतियों, आंदोलनों के मकसद और समाज की एकता पर अपनी बात रखी।
भागवत के मुताबिक पश्चिमी दुनिया से एक तूफान उठा है, जो सभ्यता, मंगल भाव, सांस्कृतिक मूल्यों और इंसानी संस्कारों को नष्ट-भ्रष्ट करना चाहता है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अल्बानिया जैसे कई देशों में यह सब हो रहा है। उनका कहना था कि कई लोगों को लगता है कि रिजीम चेंज करने से हालात बदल जाएंगे, लेकिन पहले भी ऐसा नहीं हुआ और आगे भी नहीं होगा। रिजीम चेंज से परिस्थिति नहीं बदलती, यह भागवत की बात है।
भागवत ने कहा कि आसुरी ताकत भारत के खिलाफ काम कर रही है। उनके अनुसार अगर भारत बड़ा हुआ तो इन आसुरी शक्तियों के इरादों में अड़चन आएगी, इसलिए भारत भी इस तूफान के निशाने पर है। उन्होंने कहा कि वे भारत को तोड़ने के लिए उतावले हैं। भागवत का कहना था कि उन्हें कुछ लोगों का साथ मिलता है और कुछ अति महत्वाकांक्षी नेता भी उनसे मिलते हैं। इन हालात को देखते हुए भारत को और सजग रहने की जरूरत है, ऐसा उन्होंने कहा।
आंदोलनों पर भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन तो होंगे ही, पर सवाल यह है कि उनका मकसद क्या होना चाहिए। उनके मुताबिक आंदोलन का मकसद समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने नेताओं से कहा कि वे ध्यान रखें कि आंदोलन से देश और समाज में फूट न पड़े और आंदोलन संविधान की सीमा में ही हों। भागवत ने कहा कि हमारा समाज इन आंदोलनों के चंगुल में न फंसे।
भागवत ने यह भी कहा कि सिर्फ आंदोलन करने से समस्या का हल निकल ही जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। समाज की सक्रिय भागीदारी से भी कई समस्याओं का उपाय खोजा जा सकता है। उनके मुताबिक समाज की सक्रियता और आपसी संवाद बढ़ना चाहिए, और समाज व देश को चलाने की जिम्मेदारी हमारी भी है। उन्होंने कहा कि अगर आंदोलन का मकसद कुछ और हो तो वह राजनीतिक हो जाता है, उससे दुश्मनी की भावना बढ़ती है, और देश विरोधी ताकतें आंदोलनों का फायदा उठा सकती हैं।
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए भागवत ने विकास की सोच पर दोबारा विचार करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पूरे हिमालयी इलाके में ऐसे संकट बार-बार आ रहे हैं, इसलिए विकास की प्रक्रिया को सही नजरिए से देखना जरूरी है। उन्होंने चेताया कि विकास के नाम पर ऐसे हालात न बनें कि उसकी कीमत इंसान के अस्तित्व को ही चुकानी पड़े।
देश की एकता और ताकत पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि हिंदू नजरिए में किसी खास पूजा पद्धति, खान-पान, रहन-सहन या सामाजिक-राजनीतिक विचार की पाबंदी नहीं है। सभी भारतीयों को एक होने की भावना बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश हमें क्या देता है, इससे आगे जाकर यह सोचना अहम है कि हम देश के लिए क्या कर सकते हैं।