यूपी चुनाव में सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर, चुनाव में अब सिर्फ चार महीने बाकी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को चार महीने रह गए हैं और सभी पार्टियां अपनी रणनीति में लगी हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच दिख रहा है।
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ चार महीने बचे हैं। सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने में लगी हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच दिख रहा है, इसलिए दोनों पार्टियों ने चुनाव में अपने फायदे और नुकसान का हिसाब लगाना शुरू कर दिया है।
समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन ने राज्य के लिए तीन समीकरण तैयार किए हैं। इनमें से दो में इंडिया गठबंधन खुद को आगे मानता है, जबकि तीसरे में भाजपा का पलड़ा भारी होता दिख रहा है। कांग्रेस-सपा और इंडिया गठबंधन राज्य में 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों को दोहराकर सरकार बनाने की कोशिश में हैं। इसी वजह से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार कहते आए हैं कि उनका ध्यान सीटों पर नहीं, जीत पर है।
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतीं और कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं। पार्टी की स्थापना के बाद से यह सपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। कांग्रेस ने भी उम्मीद से बेहतर नतीजे दिए। उसने अमेठी, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, अलाहाबाद और सहारनपुर की सीटें जीतीं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 35 प्रतिशत सफलता हासिल की।
इंडिया गठबंधन का तीसरा आकलन यह है कि दूसरे राज्यों में प्रतिकूल हालात के बावजूद भाजपा को जो जीत मिली, उसे देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की जीत का सिलसिला जारी रह सकता है। यहां योगी आदित्यनाथ की मदद से भाजपा अपनी सरकार बचाने की कोशिश करेगी। इसके लिए बिहार की तरह महिलाओं को नकद रकम देने जैसी अलग-अलग योजनाएं चलाई जा सकती हैं, और केंद्र सरकार इसके लिए अपना खजाना खोल सकती है। इसके अलावा, अगर भाजपा को सीटें कम पड़ीं, तो दूसरे राज्यों की तरह वह अपनी सरकार बनाने के लिए घोड़ाबाजार और अलग-अलग पार्टियों में फूट का सहारा ले सकती है।
इस पृष्ठभूमि में समाजवादी पार्टी चाहती है कि इंडिया गठबंधन सिर्फ उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़े, जहां उसकी जीत की 100 प्रतिशत संभावना हो। यही नहीं, टिकट सिर्फ उन्हीं को दिया जाए जो पार्टी तोड़ने या छोड़ने के बारे में कभी सोचेंगे भी नहीं। समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से भी अपील की है कि वह उम्मीदवार चुनते समय इन बातों का ध्यान रखे। ऐसा न होने पर भाजपा कम सीटों के बावजूद उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बना सकती है।
विधानसभा सीटों के लिहाज से देखें तो इंडिया गठबंधन ने 224 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल की है। लोकसभा चुनाव के अनुमान के मुताबिक रालोआ ने 174 विधानसभा सीटों पर बढ़त ली थी, जबकि दूसरों ने पांच विधानसभा सीटें जीतीं। इंडिया गठबंधन का यह प्रदर्शन भाजपा और रालोआ पर उसकी बढ़त को साफ दिखाता है।