संघ के विजयादशमी उत्सव में इस्राइल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच और जगदीप धनखड़ को न्योता
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव मंगलवार, 20 अक्टूबर को नागपुर के रेशीमबाग मैदान पर होगा। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन सुबह 7.40 बजे है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इस साल का विजयादशमी उत्सव नागपुर के रेशीमबाग मैदान पर मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुबह 7.40 बजे होगा। इस कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का उद्बोधन होना है। यह उत्सव संघ के इतिहास के एक अहम मोड़ पर हो रहा है, क्योंकि इसी के साथ संघ के शताब्दी वर्ष का समापन हो रहा है और आगे की दिशा भी तय होनी है। इसी वजह से देश की नज़र इस आयोजन पर लगी है।
कार्यक्रम के लिए कुछ मेहमानों को बुलाया गया है। दैनिक जागरण के मुख्य संपादक संजय गुप्ता प्रमुख अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। उनके साथ पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुंबई में इस्राइल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच को भी न्योता दिया गया है। मेहमानों की इस सूची की वजह से उत्सव को लेकर चर्चा भी हो रही है।
संघ की स्थापना डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन की थी। इसलिए संघ के लिए विजयादशमी सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, यह उसका स्थापना दिवस भी है। नागपुर संघ की जन्मभूमि है, इसलिए रेशीमबाग में होने वाले इस आयोजन की संगठन और इतिहास, दोनों नज़र से अपनी अहमियत है।
संघ की स्थापना से लेकर शताब्दी तक के सफर में संगठन का विस्तार, शाखाओं की व्यवस्था, स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे काम का जायज़ा इस मौके पर अहम माना गया है। शताब्दी वर्ष में संघ ने अपने विचार और काम करने के तरीके को समाज तक पहुंचाने पर ज़ोर दिया है। ऐसे में शताब्दी वर्ष के अनुभव, संगठन की प्राथमिकताओं और आगे के लक्ष्यों पर सरसंघचालक क्या कहते हैं, इस पर नज़र रहेगी।
विजयादशमी पर सरसंघचालक का भाषण संघ के सालाना कार्यक्रमों की खास पहचान है। इसमें देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सवालों पर संघ का नज़रिया रखा जाता है और संघ के आगे के सफर के संकेत भी मिलते हैं। इस बार सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकात्मता, स्वदेशी, नागरिकों की सामाजिक ज़िम्मेदारी और संगठन के विस्तार जैसे विषयों पर क्या बोला जाता है, इसकी उत्सुकता है। ये संभावित मुद्दे ही हैं। भाषण में असल में क्या कहा जाएगा, यह कार्यक्रम से पहले तय नहीं माना जा सकता।
मेहमानों की मौजूदगी का राजनीतिक या अंतरराष्ट्रीय मतलब निकालते समय संबंधित लोगों की भूमिका और कार्यक्रम में असल में जो कुछ होता है, उसे भी ध्यान में रखना ज़रूरी होगा। शताब्दी वर्ष का समापन संघ के लिए पिछले सौ साल के काम का जायज़ा लेने और अगले पड़ाव की दिशा साफ करने का मौका होगा। इसलिए इस बार का विजयादशमी उत्सव सिर्फ सालाना परंपरा नहीं रह जाता। सरसंघचालक के उद्बोधन से संघ की आगे की दिशा और मौजूदा सवालों पर उसका रुख साफ होने की उम्मीद है।
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