एमपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे पर अड़े छात्र, पुणे में आंदोलन आठवें दिन भी जारी
पुणे में गरवारे कॉलेज के पास एस. एम. जोशी पुल इलाके में छात्रों का आंदोलन गुरुवार को आठवें दिन भी चला। छात्र आयोग अध्यक्ष विवेक भीमनावर के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं।
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पुणे में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के कामकाज के खिलाफ छात्रों का आंदोलन गुरुवार को आठवें दिन भी जारी रहा। गरवारे कॉलेज के पास एस. एम. जोशी पुल के इलाके में छात्र डटे हुए हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग है कि आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनावर इस्तीफा दें। आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि आयोग के कामकाज में सफाई होनी चाहिए और परीक्षाओं में पारदर्शिता आनी चाहिए।
इसी बीच महाज्योति की परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर मंत्री अतुल सावे के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन में उठी। छात्रों का आरोप है कि महाज्योति की परीक्षा के दौरान नांदेड़, पुणे और कुछ दूसरी जगहों के परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी दिक्कतें आईं और गड़बड़ी हुई। उनकी मांग है कि वह परीक्षा रद्द करके दोबारा ली जाए और इन केंद्रों को ब्लैकलिस्ट किया जाए। आंदोलनकारियों ने एमपीएससी के छात्रों से अपील की कि वे महाज्योति के छात्रों के आंदोलन को समर्थन दें। उन्होंने यह भी रखा कि अगर महाज्योति के छात्र आंदोलन में शामिल होते हैं, तो उनकी मांगों में अतुल सावे के इस्तीफे की मांग भी जोड़ी जाएगी।
विधायक रोहित पवार ने आंदोलन की जगह पर छात्रों से बात की और एमपीएससी के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गरीब और गांव के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बड़ी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती है, और परीक्षा प्रक्रिया की गड़बड़ियों का सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं को होता है। पवार के मुताबिक छात्र नहीं चाहते कि एमपीएससी की परीक्षाओं में नॉर्मलाइजेशन का तरीका अपनाया जाए।
आंदोलन की जगह पर टीईटी परीक्षा की गड़बड़ी का मुद्दा भी उठा। आंदोलनकारियों ने पूछा कि टीईटी गड़बड़ी की जांच पहले हुई थी, लेकिन उसके बाद की घटनाओं पर सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई की या नहीं। उन्होंने मांग की कि आदिवासी छात्रों के सवालों को भी सरकार गंभीरता से ले। इस आंदोलन को नांदेड़, जालना, पुणे, नागपुर और अहिल्यानगर समेत कई जिलों से आए छात्रों और आम लोगों ने समर्थन दिया। छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का इरादा जताया।
इससे पहले एमपीएससी अध्यक्ष की प्रतीकात्मक अर्थी जलाई गई थी। बुधवार को आंदोलन की जगह पर उसकी राख चुनने का कार्यक्रम किया गया। इस दौरान छात्रों ने चिल्लाकर अपना दुख जताया।
विधान परिषद के विधायक अमित गोरखे ने कहा कि वे खुद एमपीएससी के छात्र रहे हैं। उनके मुताबिक छात्रों का वक्त बर्बाद न हो और ऑब्जेक्टिव पद्धति में पारदर्शिता रहे, इसके लिए चल रहे आंदोलन को उनका समर्थन है। गोरखे ने कहा कि वे छात्रों की आवाज विधिमंडल में उठाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस छात्रों के सवाल जरूर सुलझाएंगे और आने वाले अधिवेशन में भी वे इन सवालों के लिए पहल करेंगे।
पूर्व विधायक जगदीश मुळीक ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को छात्रों से लगाव है और वे हमेशा उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। मुळीक के मुताबिक एमपीएससी के सवाल पर आयुक्त व्ही. राधा की अगुवाई में समिति बनाई गई है और उसका काम चल रहा है। उन्हें भरोसा है कि सकारात्मक फैसला होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि रोहित पवार जैसे नेता छात्रों को भटकाकर उनका राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं और यह उन्हें रोकना चाहिए।
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