नागपुर में विधानसभा विस्तार के लिए 80 मीटर सड़क बंद करने का प्रस्ताव, संविधान चौक के आंदोलनकारी चिंतित
नागपुर नगर निगम ने महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 203 के तहत सार्वजनिक सूचना जारी की है। आपत्तियां 30 दिनों के भीतर देनी होंगी।
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नागपुर के संविधान चौक को लेकर एक नया विवाद खड़ा होने की आशंका है। यह आंदोलनों की पुरानी जगह है और अब इसके आसपास की सार्वजनिक जगह पर सवाल उठ रहे हैं। वजह यह है कि नागपुर नगर निगम के संपत्ति विभाग ने महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 203 के तहत एक सार्वजनिक सूचना जारी की है।
इस सूचना में विधानसभा परिसर के विस्तार के लिए एक मौजूदा सार्वजनिक सड़क को बंद करने का प्रस्ताव रखा गया है। सूचना सामने आने के बाद संविधान चौक और उसके आसपास आने-जाने वाले लोगों को लेकर आंदोलनकारियों और प्रदर्शनकारियों में चिंता बढ़ गई है।
नगर निगम ने हाल ही में एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। उसमें कहा गया है कि विधानसभा के ठीक आसपास की तिकोने आकार की जगह और मौजूदा विधानसभा जगह के बीच एक सड़क है। यह सड़क करीब 18 मीटर चौड़ी और लगभग 80 मीटर लंबी है। विज्ञापन के मुताबिक विधानसभा भवन के विस्तार के लिए यह सड़क जरूरी है और इसी वजह से इसे बंद करने का प्रस्ताव रखा गया है।
अब सवाल यह है कि सड़क ठीक कहां की है। नगर निगम की सार्वजनिक सूचना के अनुसार प्रस्तावित सड़क मौजा सीताबर्डी, खसरा नंबर 283, नगर भू-मापन नंबर 1855/1 और आरक्षण नंबर W-55 (पार्किंग) के अंतर्गत आती है। सूचना में कहा गया है कि इस हिस्से में अभी जो सड़क सार्वजनिक इस्तेमाल में है, उसे बंद करना प्रस्तावित है।
योजना यह है कि विधान भवन के विस्तार के लिए इस सड़क की जमीन उपलब्ध कराई जाए। इसका सीधा मतलब यह है कि मौजूदा सार्वजनिक रास्ते का स्वरूप बदल सकता है और उस इलाके की जमीन का इस्तेमाल विधानसभा परिसर के विस्तार के लिए हो सकता है।
नागपुर नगर निगम ने इस प्रस्ताव पर नागरिकों और संबंधित पक्षों को लिखित आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया है। सार्वजनिक सूचना के मुताबिक आपत्ति या आपत्तियां महानगरपालिका मुख्यालय में लिखित रूप में, तय अवधि के भीतर जमा की जा सकती हैं।
सूचना में खास तौर पर कहा गया है कि आपत्तियां 30 दिनों के भीतर जमा करनी होंगी। तय अवधि खत्म होने के बाद मिलने वाली आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। इसलिए संविधान चौक, सीताबर्डी और आसपास के इलाके के नागरिकों, सामाजिक संगठनों, व्यापारी संगठनों और सार्वजनिक जगहों को बचाने की मांग करने वाले समूहों के लिए इसे एक अहम मौका माना जा रहा है।
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