मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:25 IST

MPSC आंदोलन में छात्रों से मिले अभिजीत दीपके, बोले- एक परीक्षा के लिए जान न दें

एमपीएससी की परीक्षा पद्धति और पेपरफुटी को लेकर चल रहे आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने छात्रों से बात की।

MPSC आंदोलन में छात्रों से मिले अभिजीत दीपके, बोले- एक परीक्षा के लिए जान न दें
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षा पद्धति, पेपरफुटी, नतीजों में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर आंदोलन चल रहा है। इसी आंदोलन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने छात्रों से बातचीत की।

छात्रों ने इस मुलाकात में कई सवाल रखे। उन्होंने एमपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया में हुए बदलावों का मुद्दा उठाया। पेपरफुटी के आरोपों से लेकर जांच में कथित खामियों तक, कई बातें सामने रखी गईं।

एक छात्र ने बताया कि एमपीएससी की परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक अंक मिलने के बाद भी कटऑफ की वजह से उसका मौका हाथ से निकल गया। उसने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर जो शक पैदा हुआ है, उसका असर छात्रों की मानसिक हालत पर पड़ रहा है। इस पर दीपके ने छात्रों से अपील की कि कैसी भी हालत हो, वे कोई चरम कदम न उठाएं।

दीपके ने छात्रों से कहा, "एक परीक्षा के लिए जिंदगी खत्म नहीं करनी है। परिवार के बारे में सोचिए और अपने हक के लिए लड़िए।" छात्रों के सवालों पर बोलते हुए उन्होंने शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के बारे में जागरूकता की जरूरत बताई।

आंदोलन की जगह पर बात करते हुए एक छात्रा ने एमपीएससी की परीक्षा पद्धति में बार-बार होने वाले बदलावों पर नाराजगी जताई। उसने यह भी कहा कि पेपरफुटी और उत्तरपत्रिका जांच में कथित गड़बड़ियों की वजह से गरीब और ग्रामीण छात्रों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

इस पर दीपके ने आलोचना करते हुए कहा, "परीक्षा लेने के बजाय अगर पैसे के जोर पर मौका मिल रहा हो, तो परीक्षा पद्धति पर ही सवाल खड़ा होता है।" उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद होना जरूरी है।

एक दूसरी छात्रा ने शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और वोट के जरिए नागरिकों की भूमिका पर सवाल उठाए। उसने पूछा कि सरकार की वजह से शिक्षा के लिए छात्रों को सड़क पर क्यों उतरना पड़ता है। उसने छात्रों से अपील की कि वे सिर्फ किताबों के आंकड़े न देखें, बल्कि जमीनी हालात पर भी गौर करें।

इस पर दीपके ने कहा कि नागरिकों को अपने मूलभूत अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होना जरूरी है।

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