पुणे में MPSC छात्रों का धरना जारी, रोहित पवार का साथ; भाजपा विधायकों ने उठाए सवाल
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे तक पुणे में छात्रों का आंदोलन जारी रहने की चेतावनी है। भाजपा विधायकों ने रोहित पवार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
पुणे में MPSC की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का आंदोलन चल रहा है। छात्र MPSC आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने साफ कहा है कि जब तक अध्यक्ष इस्तीफा नहीं देते, वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
छात्र कल रात से पुणे के एस. एम. जोशी सभागृह के पास गरवारे पुल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि MPSC परीक्षाओं से जुड़े सवालों और छात्रों को बार-बार होने वाले नुकसान की वजह से यह आंदोलन किया जा रहा है। पुणे में स्पर्धा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों छात्र सड़क पर उतरे हैं।
इसी दिन मुंबई के शिवाजी पार्क मैदान में मुख्य निवडणूक आयुक्त ग्यानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी आंदोलन चल रहा है।
पुणे के आंदोलन में विधायक रोहित पवार और विधायक विश्वजीत कदम ने पहुंचकर छात्रों को समर्थन दिया। रोहित पवार ने आयोग के अध्यक्ष पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि दूसरे राज्यों में ऐसी कार्रवाई हो सकती है, तो महाराष्ट्र में आयोग के अध्यक्ष पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। आंदोलनकारियों का दावा है कि अध्यक्ष के पद पर रहते हुए उनके खिलाफ ठीक से कार्रवाई नहीं हो सकती।
आंदोलन से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि अगर छात्रों का बार-बार नुकसान हो रहा है और उन्हें पढ़ाई छोड़कर आंदोलन के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
रोहित पवार के आंदोलन को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। भाजपा विधायक राजेंद्र राऊत ने रोहित पवार की आलोचना की और उनके आंदोलन की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के जरिए प्रसिद्धि हासिल करने की कोशिश की जा रही है।
भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते ने भी रोहित पवार के आंदोलन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि रोहित पवार MPSC पेपरफुटी के मुद्दे पर पुणे में आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब छात्रों की मांगों पर शासन की ओर से कार्यवाही चल रही है, तो आंदोलन की जरूरत क्या है।
30 सितंबर को MPSC के छात्र प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक हुई थी। इसमें छात्रों के सवालों और अलग-अलग मांगों पर चर्चा हुई। इसके बाद शासन ने MPSC के सचिव महेंद्र हरपाळकर के तबादले का आदेश निकाला।
फिर भी छात्रों की मुख्य मांग आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे की है, इसलिए आंदोलन अभी जारी है। अब देखना होगा कि छात्र शासन की कार्यवाही से संतुष्ट होते हैं या नहीं और आंदोलन वापस लिया जाता है या नहीं। फिलहाल पुणे का यह आंदोलन, अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग और उस पर शुरू हुए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप राज्य में स्पर्धा परीक्षा से जुड़े लोगों की नजर में हैं।
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