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14:19 IST

कराड के बापूजी साळुंखे कॉलेज में प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर वर्कशॉप

कराड के शिक्षणमहर्षी बापूजी साळुंखे महाविद्यालय में 5 अक्टूबर 2026 को नई शिक्षा नीति 2020 के तहत वर्कशॉप हुई, जिसमें प्रो. डॉ. ए. के. पाटील ने प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की अहमियत बताई।

कराड के बापूजी साळुंखे कॉलेज में प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर वर्कशॉप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

श्री स्वामी विवेकानंद शिक्षण संस्था, कोल्हापूर संचलित शिक्षणमहर्षी बापूजी साळुंखे महाविद्यालय, कराड में 5 अक्टूबर 2026 को एक वर्कशॉप हुई। वर्कशॉप का विषय था 'प्रकल्प कार्य व प्रत्यक्ष कार्य प्रशिक्षण', यानी प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, और यह नई शैक्षणिक नीति 2020 के मुताबिक रखी गई थी। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. डॉ. सतीश घाटगे की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ पूरा हुआ।

वर्कशॉप के प्रमुख मार्गदर्शक प्रो. डॉ. ए. के. पाटील थे। उन्होंने कहा कि नई शैक्षणिक नीति 2020 के हिसाब से प्रोजेक्ट वर्क और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से विद्यार्थियों को पर्यावरण, समाज और अलग-अलग कार्यक्षेत्रों की असलियत समझने में मदद मिलती है। उनके मुताबिक विद्यार्थियों की रोजगार लायक स्किल बढ़ाने के लिए ये दोनों बातें बहुत जरूरी हैं।

प्रो. पाटील ने कहा कि सिर्फ क्लास में बैठकर विद्यार्थियों को यह पूरी तरह पता नहीं चल सकता कि उनके आसपास के पर्यावरण और समाज में क्या हो रहा है। असली प्रोजेक्ट वर्क से ही हकीकत समझ में आती है। पर्यावरण में खुद गए बिना वहां की समस्याएं समझ नहीं आतीं, और समाज में सीधे काम किए बिना समाज का दर्द और उसकी परेशानियां जानी नहीं जा सकतीं। इसलिए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अभ्यासक्रम की कोई एक समस्या चुनकर उस पर प्रोजेक्ट वर्क करना जरूरी है।

प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के बारे में उन्होंने बताया कि इससे विद्यार्थियों को अलग-अलग क्षेत्रों में काम का अनुभव मिलता है। विद्यार्थी औद्योगिक क्षेत्र, बैंक, पतसंस्था, वीटभट्टी और दूसरे कई व्यवसायों और कार्यक्षेत्रों में जाकर वहां का कामकाज समझते हैं। उनके मुताबिक आगे रोजगार के लिए जो स्किल चाहिए, उन्हें तैयार करने में इस ट्रेनिंग से काफी फायदा होता है।

अध्यक्षीय मार्गदर्शन में प्राचार्य प्रो. डॉ. सतीश घाटगे ने कहा कि नई शैक्षणिक नीति 2020 शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने वाली नीति है। उन्होंने बताया कि आज के दौर की चुनौतियों का सामना करते हुए विद्यार्थी आत्मनिर्भर बने, इसी मकसद से इस नीति के तहत अभ्यासक्रम की रचना की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को अभ्यासक्रम की हर बात पर गंभीरता से ध्यान देकर उसे अपनाना चाहिए।

कार्यक्रम की प्रस्तावना परीक्षा विभाग प्रमुख प्रा. सुरेश काकडे ने रखी। प्रमुख मेहमानों का परिचय डॉ. मारुती सूर्यवंशी ने कराया। आभार प्रा. विश्वनाथ सुतार ने माना और सूत्रसंचालन प्रा. ज्योती धर्माधिकारी ने किया। आय.क्यू.एस.सी. समन्वयक प्रा. रत्नाकर कोळी के साथ कॉलेज के सभी गुरुदेव कार्यकर्ता भी मौजूद थे। बी.ए. भाग 3 और बी.कॉम. भाग 3 के ज्यादातर विद्यार्थी इस वर्कशॉप में शामिल हुए।

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