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01:50 IST

दशहरा मेले में उद्धव ठाकरे की सरकार को चुनौती, हिम्मत है तो बैलेट पेपर पर चुनाव कराओ

शिवसेना के दशहरा मेले में उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और भाजपा पर चुनावी गड़बड़ी, छात्रों पर दमन और नकली हिंदुत्व को लेकर तीखा हमला किया।

दशहरा मेले में उद्धव ठाकरे की सरकार को चुनौती, हिम्मत है तो बैलेट पेपर पर चुनाव कराओ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

शिवसेना के ऐतिहासिक दशहरा मेले में उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार और भाजपा पर जमकर हमला बोला। उनका आरोप था कि ये लोग चुनावों में गड़बड़ी करके सत्ता में बैठे हैं। सत्ताधारियों को खुली चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि असली मर्दानगी है तो EVM मशीनें एक तरफ रखो और सीधे बैलेट पेपर पर चुनाव करवाकर दिखाओ।

भाषण में उन्होंने छात्रों पर हो रहे दमन, मुंबई की अस्मिता, नकली हिंदुत्व और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका के मुद्दे उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए ठाकरे ने रामायण का हवाला दिया। उनके मुताबिक जैसे बिभीषण और श्रीराम ने रावण को मारने के लिए यह राज खोला था कि उसकी जान उसकी नाभि में है, वैसे ही आज मोदी और शाह की असली जान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार में अटकी है।

ठाकरे ने कहा कि वोट चुराकर सत्ता हथियाने वाले इन नेताओं की पोल खुल चुकी है। दिल्ली में आंदोलन कर रहे छात्रों पर अमानवीय अत्याचार के कई वीडियो सामने आए हैं। कई नौजवानों के शरीर पर लाठियों के निशान उभरे हैं और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि "मर भी गए तो चलेगा, पर अब पीछे नहीं हटेंगे", यह उन नौजवानों का गुस्सा पेपर लीक के खिलाफ था और पिछले 12 से 20 साल की बेहिसाब यातना के खिलाफ भी था।

आंदोलन में सड़क पर उतरे युवाओं को "दिमागी नक्सल" और अपराधी ठहराने वाली सोच का उन्होंने कड़ा विरोध किया। ठाकरे के मुताबिक आंदोलन करने वाले सिर्फ छात्र नहीं थे। यह पिछले 12 साल में प्रशासनिक व्यवस्था से पिसे आम लोगों की चीख थी। मां-बाप अपने कम उम्र बच्चों को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं और आप उनके बारे में कुछ भी बकवास कर रहे हैं, यह उनकी तीखी प्रतिक्रिया थी।

उन्होंने पूछा कि क्या यह भूल गए कि इसी उम्र के नौजवानों ने देश की आजादी के लिए जान की बाजी लगाई थी। अनंत कान्हेरे, भगत सिंह और चाफेकर बंधुओं जैसे बीस-बाइस की उम्र के क्रांतिकारियों को उन्होंने याद किया। छत्रपति शिवाजी महाराज जब रणभूमि में दुश्मन से लड़ने उतरे, तब उनकी उम्र क्या थी, यह भी उन्होंने पूछा। अफजल खान ने शिवराय को हल्के में लेकर "पहाड़ का चूहा" कहा था, पर सिर्फ 29 साल के शिवराय ने क्या पराक्रम किया, यह पूरी दुनिया ने देखा। आज उसी उम्र के बच्चों को नक्सल और "कॉकरोच" कहा जा रहा है, यह कैसी मानसिक विकृति है, ठाकरे ने यह सवाल उठाया।

पुलिस को खरी-खरी सुनाते हुए उन्होंने कहा कि लोग इंसाफ मांगने सड़क पर उतर रहे हैं। बोलने से न्याय न मिले तो जनता आखिर करे क्या? किसी को भी पुलिस का चक्कर अपने पीछे लगवाने या परिवार पर मुसीबत बुलाने का शौक नहीं होता। पुलिस से उनका साफ कहना था कि सत्ता के इशारे पर भेड़ियों की तरह बर्ताव न करें। किसी पर डंडा उठाते वक्त सोचें कि कल यह खुद पर ही न पलट जाए। उन्होंने गुस्से में कहा कि शहर में तिरंगा यात्रा निकालने वाले आम लोगों के घरों पर नोटिसों की बारिश होती है, जबकि शहर के बीचोबीच अपराधी और हत्यारे खुलेआम घूमकर गोलीबारी करते हैं और वहां एजेंसियां आंख मूंद लेती हैं।

मुंबई की अस्मिता पर बोलते हुए ठाकरे आक्रामक हो गए। कुछ लोग मुंबई आकर खुलेआम कहते हैं कि "घाटकोपर की भाषा गुजराती है"। इसका कड़ा विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र भले बहुभाषी राज्य है, पर यह मूल रूप से मराठी मानुष का ही है। उनके मुताबिक हमारे कुछ लोग सत्ता के फायदे के लिए दुम दबाकर चुप बैठे हैं, तो क्या अब वे हमें हिंदुत्व का पाठ पढ़ाएंगे? पहले भी मुंबई को गुजरात में मिलाने की कई कुटिल कोशिशें हुई थीं, पर मराठी मानुष सीना तानकर खड़ा रहा, इसीलिए मुंबई महाराष्ट्र में रही। उन्होंने चेताया कि शिवसेना खत्म करके मुंबई आसानी से निगली जा सकती है, ऐसा किसी को लगता हो तो याद रखे कि मराठी मानुष वक्त आने पर पेट फाड़कर बाहर आए बिना नहीं रहेगा।

विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम और किताबों पर ठाकरे ने कहा कि कुछ अहम किताबें लाइब्रेरियों और पाठ्यक्रम से जबरन हटाई जा रही हैं। भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले के साहित्य और विचारों में जहर घोला गया है, ऐसा झूठा दावा करके किताबें हटाने के फतवे निकाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी बेनाम सोशल मीडिया हैंडल से ऐसी मांग उठती है और प्रधानमंत्री कार्यालय उस पर फौरन गंभीरता से फतवे जारी कर देता है।

उन्होंने कहा कि जब तक समाज हर तरह से सुधरता नहीं, देश की असली आजादी टिक नहीं सकती। इसी बहाने उन्होंने शिवसेना प्रमुख के विचार याद दिलाए। उनके मुताबिक शिवसेना प्रमुख ने राजनीति में धर्म जरूर लाया था, पर वह कभी संकुचित नहीं था। वह 80 फीसदी समाजसेवा और 20 फीसदी राजनीति का त्रिवेणी संगम था। शिवसेना की स्थापना मराठी मानुष और हिंदुओं को दुनिया में सीना तानकर जीने का आत्मविश्वास देने के लिए हुई थी, और वह गाडगेबाबा के समाजसुधार के विचारों वाला असली हिंदुत्व था।

मौजूदा सत्ताधारियों पर वार करते हुए ठाकरे ने पूछा कि बाबरी ढांचा गिराया गया, तब आज खुद को बड़ा हिंदुत्ववादी कहने वाले ये लोग किस बिल में छिपे थे? उनके मुताबिक बाबरी गिरी तो ये सब दुम दबाकर बैठे थे। उन्होंने कहा कि हमारा हिंदुत्व चोटी और जनेऊ तक सीमित नहीं है, वह देश के प्रति असीम राष्ट्रप्रेम का है। जान की जरा भी परवाह किए बिना घमासान के बीच मैदान में दौड़ पड़ने वाला कार्यकर्ता ही हमारा असली शिवसैनिक है।

आज राजनीति के लिए धर्म का सहूलियत से इस्तेमाल हो रहा है, यह भी उन्होंने कहा। "हाथ में काम नहीं और जय श्री राम" का नारा देने वाला हिंदुत्व हमारा नहीं हो सकता। उनके शब्दों में "पेट के लिए हाथ को काम और मुंह में लगातार जय श्री राम", यही हमारा सच्चा हिंदुत्व है। देशवासी मुस्लिम हो तो उसका हरा रंग, दलित हो तो नीला रंग, या किसी और तबके का कोई भी रंग हो, आखिर में हम सबका एक ही रंग और शान "तिरंगा" है, यही हमारा सब कुछ है। इसी बात के साथ उन्होंने अपना भाषण खत्म किया।

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