दशहरा मेले में उद्धव ठाकरे का शिंदे पर निशाना, टाइगर श्रॉफ पर हमले का दिया हवाला
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवाजी पार्क के दशहरा मेले में कानून-व्यवस्था पर सत्ताधारियों को घेरा।
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मुंबई: शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पक्ष के पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवाजी पार्क पर हुए दशहरा मेले में राज्य की कानून और सुव्यवस्था के मुद्दे पर सत्ताधारियों को निशाने पर लिया। उन्होंने अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए कथित जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की आलोचना की। इसी भाषण में उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा।
भाषण में ठाकरे ने टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की घटना का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद एकनाथ शिंदे ने टाइगर श्रॉफ से मुलाकात की। इसी बात को लेकर ठाकरे ने सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। उनके शब्द थे: "टाइगर श्रॉफ पर हमला हुआ, ये चमकू फौरन देखने चले गए। 15 घंटों में गुंडे पकड़े, उसकी तारीफ करनी है क्या? अगर उस लड़के को गोली लग गई होती, तो आरोपी पकड़कर क्या चाटना है?"
ठाकरे ने कहा कि जुर्म होने के बाद आरोपियों को गिरफ्तार करना जरूरी तो है, लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं हों ही नहीं, इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों ने क्या किया। उन्होंने यह भी कहा कि हथियार लेकर आने वाले आरोपियों को पहले ही रोका जा सकता था, तो हालात अलग होते।
इस घटना को आधार बनाकर ठाकरे ने राज्य की कानून और सुव्यवस्था पर टिप्पणी की। उनके भाषण से ये सवाल उठे कि क्या हमले से पहले ही सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध हरकतों की जानकारी मिल चुकी थी और ऐसी वारदातें रोकने के लिए कौन-सी एहतियात बरती जाती है। उन्होंने यह मुद्दा रखा कि आरोपियों को पकड़ने की तारीफ करने से ज्यादा जरूरी नागरिकों की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता देना है।
फडणवीस पर टिप्पणी करते हुए ठाकरे ने लॉरेन्स बिष्णोई का नाम लिया। बिष्णोई के साबरमती जेल में होने का हवाला देकर उन्होंने सरकार की भूमिका पर सवाल खड़ा किया। चुनौती भरे लहजे में उन्होंने कहा: "फडणवीसजी, तुम्हारे अंदर दम हो तो तुम्हारे बाबा के पास जाओ और ले आओ उस बिष्णोई को।" इसी मौके पर उन्होंने "शहरी नक्षल" शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार को घेरा।
कुल मिलाकर दशहरा मेले में उद्धव ठाकरे ने टाइगर श्रॉफ पर हमला, नागरिकों की सुरक्षा और लॉरेन्स बिष्णोई का मुद्दा उठाकर सत्ताधारियों की आलोचना की। उनके इन बयानों से राज्य की कानून और सुव्यवस्था का सवाल एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
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